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सरला ठकरालः भारत की पहली महिला विमान चालक की प्रेरक कहानी

Updated on 11 March, 2017 at 10:12 am By

सरला ठकराल भारत की पहली महिला विमान चालक, लाहौर हवाई अड्डा और साल 1936।

सुनने में यह एक परी कथा ही लगती है कि एक 21 वर्षीय भारतीय नारी अपनी साड़ी के पल्लू को संभालते हुए जिप्सी मॉथ नामक दो सीटों वाले विमान में सवार होती है। चेहरे पर मुस्कुराहट लिए आंखों पर चश्मा लगाती है और पल भर में उस विमान को लेकर आसमान छू लेती है।


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यह वो समय था जब आकाश में उड़ना ही एक बड़ी बात थी, जहाज उड़ाना बहुत ही बड़ी चीज समझी जाती थी। और ऊपर से ऐसा माना जाता था कि ऐसा काम सिर्फ़ पुरुष ही कर सकते हैं और इसी मिथक को तोड़ा भारत की पहली महिला विमान चालक सरला ठकराल ने।

सरला ठकराल को जब वर्ष 1936 में पहली बार साड़ी पहन कर हवाई जहाज़ उड़ाने का गौरव प्राप्त हुआ, तो ऐसा करने वाली वो भारत की पहली नारी थी। और एक चार साल की बेटी की मां भी थीं।

सरला ठकराल ने यह उपलब्धि हासिल करने से पहले पी. डी. शर्मा, जो स्वयं एक व्यावसायिक विमान चालक थे, से शादी की थी। तब वह मात्र सोलह साल की थीं। उनके पति ने हमेशा ही सरला को प्रोत्साहित किया। सरला ने एक साक्षात्कार में बतायाः

“मेरे पति को पहले भारतीय एयर मेल पायलट का लाइसेंस मिला था। उन्होंने कराची और लाहौर के बीच उड़ान भरी थी। जब मैं अपने आवश्यक उड़ान के घंटे पूरे कर लिए, तब मेरे प्रशिक्षक चाहते थे कि मैं सोलो उड़ान भरूं, लेकिन मेरे पति वहां नहीं थे।  मुझे मेरे परिवार के सपोर्ट की ज़रूरत थी। मैं उनसे अनुमति लेना चाहती थी। उन लड़कों ने भी मुझसे कभी कोई सवाल नहीं किया, जिन्हें मेरे साथ प्रशिक्षित किया जा रहा था। सिर्फ फ्लाइंग क्लब के एक व्यक्ति, जो क्लर्क था को मेरे उड़ने से आपत्ति थी। अन्यथा मुझे कभी किसी विरोध का सामना नही करना पड़ा।”

 

कॉकपिट के अंदर का दृश्य indiatimes

कॉकपिट के अंदर का दृश्य
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यही नहीं 1000 घंटे की उड़ान पूरी करने के बाद ‘A’ लाइसेंस प्राप्त करने वाली भी वह पहली भारतीय महिला थीं। वह कराची और लाहौर के बीच उड़ान भरती थीं। सरला अपने परिवार से मिले प्रोत्साहन को साझा करते हुए कहती हैंः



“हालांकि यह परिवार के बारे में पर्याप्त नहीं है, लेकिन मेरे ससुर जी मुझसे और भी अधिक उत्साहित थे और उन्होने मुझे फ्लाइंग क्लब में दाखिला दिलाया। मैं जानती थी मैं एक सख़्त पुरुषवादी परंपरा तोड़ रही थी, लेकिन उन्होने मुझे कभी यह एहसास नहीं होने दिया कि मैं कुछ अलग कर रही हूं।”

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वह विमान जिससे रचा इतिहास indiatimes

1939 सरला के लिए किसी दुर्भाग्य से कम नही था। वह कमर्शियल पायलट लाइसेंस लेने के लिए मेहनत कर रही थीं। लेकिन तभी दूसरा विश्व युद्ध छिड़ गया और उन्हें ट्रेनिंग रोकनी पड़ी। इसके बाद जो कुछ हुआ इससे उन्होने कमर्शियल पायलट बनने के सपने को त्याग दिया।

दरअसल, उसी साल एक विमान दुर्घटना में उनके पति का देहांत हो गया और उन्होंने अपने जीवन की दिशा बदल ली।

दुर्घटनाग्रस्त विमान जिसमें पति की हुई मृत्यु indiatimes

दुर्घटनाग्रस्त विमान जिसमें पति की हुई मृत्यु
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पति की जब मृत्य हुई तब वह लाहौर में थीं और उनकी उम्र थी सिर्फ 24 साल। वह वापस भारत लौट गईं और मेयो स्कूल ऑफ़ आर्ट में दाख़िला ले लिया। जहां उन्होंने बंगाल स्कूल ऑफ पेंटिंग सीखी और फ़ाइन आर्ट में डिप्लोमा लिया।

विभाजन के बाद सरला अपनी दो बेटियों के साथ दिल्ली आ गईं। दिल्ली में ही उनकी मुलाकात पी.पी. ठकराल से हुई, जिनसे उन्होंने 1948 में शादी कर ली। अपने जीवन की दूसरी पारी में सरला एक सफल उद्धमी और पेंटर बनीं। वह कपड़े और गहने भी डिज़ाइन करती थीं।

यह कहना ग़लत नहीं होगा कि सरला भारतीय महिलाओं का एक नया और आत्मविश्वास से भरे चेहरे का प्रतिनिधित्व करती हैं।


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उनकी कहानी साहस और दृढ़ संकल्प की एक ताजा हवा की तरह है, जो सैकड़ों पीढ़ियों तक युवाओं, ख़ासकर महिलाओं को प्रेरित करती रहेंगी। पर अफसोस उनकी कहानी 15 मार्च 2008 में उनकी मौत के साथ दफना दी गई। लेकिन, वह हमारे रूह में, हमारे ज़हन में हमेशा ज़िंदा रहेंगी।

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