Topyaps Logo

Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo

Topyaps menu

Responsive image

जिसने देश को दिया पहला टेस्ट ट्यूब बेबी; उसे बदले में सम्मान नहीं, बल्कि मौत मिली

Published on 7 August, 2018 at 4:11 pm By

साल 1978, भारत के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि के नाम दर्ज है। भारत में 1978 में पहली बार IVF तकनीक की मदद से एक बच्ची का जन्म कोलकाता में हुआ था। उस वक्त कोलकाता के डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय ने देश के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी को अवतरित कर इतिहास रच दिया था। सुभाष मुखोपाध्याय ने अपने सहयोगियों के साथ तीन अक्तूबर, 1978 को भारत में IVF प्रणाली से पहली टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म कराया। यह बच्ची दुर्गा पूजा के दिन पैदा हुई थी, इसलिए उसे सब दुर्गा कहने लगे। बाद में उसका नाम कनुप्रिया अग्रवाल रखा गया।


Advertisement

 

kanupriya agrawal india first test tube baby

 

जिस साल कनुप्रिया का जन्म हुआ, उसी साल दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी भी इंग्लैंड में जन्मीं, जिसका नाम लुइस ब्राउन रखा गया। लुइस ब्राउन का जन्म कनुप्रिया से दो महीने पहले ही हुआ था। इस तरह से कनुप्रिया भारत की पहली और विश्व की दूसरी टेस्ट ट्यूब बेबी बनी।

आज कनुप्रिया विवाहित हैं और फिलहाल वे एक कंप्यूटर कंसल्टेंसी कंपनी में बतौर मैनेजर कार्यरत हैं।

 

 

लेकिन क्या आपको पता है कि कनुप्रिया को IVF तकनीक के जरिए जन्म देने वाले डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय को उनके इस काम का श्रेय काफी सालों बाद मिला।


Advertisement

 

इसे दुर्भाग्य नहीं तो और क्या कहेंगे कि भारत की पहली और दुनिया की दूसरी टेस्ट ट्यूब बेबी के जनक डॉ सुभाष मुखोपाध्याय के दावे को किसी ने नहीं माना। उनका मजाक उड़ाया गया। उनके दावों की जांच के लिए बिठाई गई कमेटी ने उन्हें सिरे से गलत करार दे दिया। उनका तबादला तक कर दिया गया। वह IVF तकनीक से बच्चे को जन्म देने की बात कहते रह गए, लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी।
वहां के डॉक्टर समेत बंगाल की सरकार ने भी उनके इस परीक्षण को सही नहीं बताया था। सरकार और डॉक्टर्स ने उनके परीक्षण को अवैध करार दिया> साथ ही उनके इस खोज को अघोषित मान लिया गया। इसका सीधा असर डाॅ सुभाष की सेहत पर पड़ा। वे डिप्रेशन में रहने लगे। फिर अचानक ही न्याय की आस खो चुके डॉ सुभाष ने 19 जून 1981 को आत्महत्या कर ली।

 

 

उनकी मौत के पांच साल बाद यानी 1986 में मुंबई में डॉ टीसी आनंद कुमार की निगरानी में एक बच्ची का जन्म हुआ, जिसे भारत का पहला आधिकारिक टेस्ट बेबी माना गया। इस बच्ची का नाम हर्षा रखा गया।



ये डिलीवरी मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉस्पिटल में हुई थी। टीम में हॉस्पिटल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कुसुम झावेरी और आईसीएमआर के डायरेक्टर डॉ. टीसी आनंद कुमार शामिल थे।

 

 

हर्षा के जन्म के आठ साल पहले ही भारत की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी दुर्गा का जन्म हो चुका था, लेकिन उसे मान्यता नहीं दी गयी।

 

 

डॉ सुभाष का दावा और शोध कार्य तो इतिहास में दफन हो चुका होता, अगर उनकी डायरी और शोध कार्य से संबंधित पेपर डॉ आनंद कुमार के हाथ नहीं लगते। वही डॉ आनंद कुमार जो हर्षा के जन्म के समय में डॉक्टर की पैनल टीम का हिस्सा थे। डॉ आनंद कुमार ने माना कि जो श्रेय उन्हें मिल रहा है, उसके असली हकदार तो डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय हैं। उनके हाथ कुछ दस्तावेज लगे जिससे ये साफतौर पर साबित हुआ कि डॉ. सुभाष ने 1978 में आइवीएफ सिस्टम से जिस लड़की दुर्गा के जन्म कराने का दावा किया था, वह दावा बिल्कुल सही था।

 

इसके बाद कई जद्दोजहद के बाद 2001 आते-आते आखिरकार डॉ मुखाेपाध्याय के दावे काे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली। इस बात को स्वीकार किया कि डॉ मुखोपाध्याय का दावा सही था और वे ही भारत में टेस्ट ट्यूट बेबी के जनक थे। दुर्गा ही पहली टेस्ट ट्यूब बेबी थी, हर्षा नहीं।

2007 में डॉ सुभाष की उपलब्धियाें काे डिक्शनरी अॉफ मेडिकल बायाेग्राफी में शामिल भी किया गया। इसमें पूरी दुनिया के साै देशाें के 1100 प्रमुख चिकित्सकाें के याेगदान काे शामिल किया जाता है।

 

 

डॉ. सुभाष के दावों को 1978 में न मानने की गलती को सही तो कर लिया गया, लेकिन अपनी इस जीत को देखने के लिए वो इस दुनिया में नहीं थे। बहरहाल, डॉ सुभाष अब अमर हाे चुके हैं। सचमुच डॉ सुभाष मुखाेपाध्या एक जीनियस डॉक्टर थे।

 

जानिए क्या है IVF


Advertisement

आईवीएफ को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन कहते हैं। ऐसी महिलाएं जिनमें अंडे नहीं डेवलप हो पा रहे या काफी कम हो रहे हैं उन्हें ये ट्रीटमेंट दिया जाता है। इस प्रक्रिया में अधिक अंडों के उत्पादन के लिए महिला को फर्टिलिटी बढ़ाने वाली मेडिसिन दी जाती हैं और उसके बाद एक छोटी सी सर्जरी के माध्यम से अंडों को निकाला जाता है। इसके बाद इन्हें प्रयोगशाला में कल्चर डिश में तैयार पति के शुक्राणुओं के साथ मिलाकर निषेचन के लिए रख दिया जाता है। लैब में इसे दो-तीन दिन के लिए रखा जाता है और इससे बने भ्रूण को वापस महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। आईवीएफ की पूरी प्रक्रिया में दो से तीन सप्ताह का समय लग जाता है। इसमें डॉक्टर की सलाह, जांच, अंडों और शुक्राणुओं का स्ट्रोरेज और अंत में निषेचन के बाद भ्रूण का गर्भ में प्रत्यारोपण शामिल है। इसकी सफलता- असफलता का पता अगले 14 दिनों में रक्त परीक्षण/प्रेग्नेंसी टेस्ट के बाद लगता है। चिकित्सकीय कारणों के कारण मां नहीं बन पाने वाली महिलाआें के लिए यह बेहतरीन तकनीक है।

Advertisement

नई कहानियां

WAR Full Movie Leaked Online to Download: Tamilrockers पर लीक हो गई WAR, एचडी प्रिंट डाउनलोड करके देख रहे हैं लोग!

WAR Full Movie Leaked Online to Download: Tamilrockers पर लीक हो गई WAR, एचडी प्रिंट डाउनलोड करके देख रहे हैं लोग!


Tamilrockers पर लीक हुई ‘छिछोरे’, देखने के साथ फ्री में डाउनलोड कर रहे लोग

Tamilrockers पर लीक हुई ‘छिछोरे’, देखने के साथ फ्री में डाउनलोड कर रहे लोग


Sapna Choudhary Songs: सपना चौधरी के ये गाने किसी को भी थिरकने पर मजबूर कर दें!

Sapna Choudhary Songs: सपना चौधरी के ये गाने किसी को भी थिरकने पर मजबूर कर दें!


जानिए कैसे डाउनलोड करें YouTube वीडियो, ये है आसान तरीका

जानिए कैसे डाउनलोड करें YouTube वीडियो, ये है आसान तरीका


प्रधानमंत्री आवास योजना से पूरा होगा ख़ुद के घर का सपना, जानिए इससे जुड़ी अहम बातें

प्रधानमंत्री आवास योजना से पूरा होगा ख़ुद के घर का सपना, जानिए इससे जुड़ी अहम बातें


Advertisement

ज़्यादा खोजी गई

टॉप पोस्ट

और पढ़ें History

नेट पर पॉप्युलर