ये हैं भारत की पहली महिला जासूस, अब तक कर चुकी हैं 75,000 केस सॉल्व

Updated on 8 Dec, 2017 at 2:47 pm

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भारतीय महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित की है फिर चाहे वो ब्यूटी कॉन्टेस्ट हो, मेडिकल फील्ड, डिफेंस, बैंकिंग, बिज़नेस या फिर पुलिस सर्विस। महिलाएं न सिर्फ हर जगह पहुंची है, बल्कि अपने काम की बदौलत अलग पहचान भी बना रही हैं।

 

इतना ही नहीं, जासूसी का क्षेत्र जो महिलाओं के लिए कभी वर्जित माना जाता था, वहां भी उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

 


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जासूसी के पेशे में महिलाओं के वर्चस्व की नीव रखने का श्रेय जाता है भारत की पहली महिला जासूस रजनी पंडित को।

 

रजनी पंडित देश की पहली फीमेल डिटेक्टिव हैं। वह रजनी पंडित डिटेक्टिव सर्विस के नाम से 25 सालों से डिटेक्टिव एजेंसी संचालित कर रहीं हैं। उनकी टीम में करीब 20 लोग हैं। रजनी आज 51 साल की हैं और जब 1991 में उन्होंने अपनी एजेन्सी की शुरुआत की थी तो वो केवल 25 साल की थीं।

 

 

 

रजनी अब तक 75000 केस सॉल्व कर चुकी हैं और अब तक उन्हें 57 अवॉर्ड मिल चुके हैं।

 

 



रजनी पंडित के लिए पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था, लेकिन इस पेशे के प्रति अपने पैशन की वजह से वो सारी मुश्किलों को पार करती गईं। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उनके पिता शांताराम पंडित मुंबई पुलिस में सीआईडी इंस्पेक्टर थे, जिन्होंने महात्मा गांधी के मर्डर केस पर भी काम किया था। रजनी का बचपन से ही अपने पिता के काम की तरफ झुकाव था। वो सोचती थी कि लोगों को सीधे पुलिस से न्याय क्यों नहीं मिलता।

 

रजनी अपने कॉलेज के दिनों का एक वाकया बताती हैं जिसने उन्हें रजनी पंडित से जासूस रजनी पंडित बना दिया। उन्होंने बताया-

 

“जब मैं कॉलेज में थी तब मैं अपनी क्लास की एक लड़की को हर दिन गलत लड़कों के साथ जाकर सिगरेट और शराब पीते हुए देखती थी। तब मैंने फैसला किया कि ये बात उस लड़की के पैरेंट्स को बतानी है। फिर मैं कॉलेज क्लर्क के पास गई और उससे कहा कि मै उसकी दोस्त हूं और उसे कुछ गिफ्ट भेजना है इसलिए मुझे उसका एड्रेस चाहिए। मुझे उस लड़की का एड्रेस मिल गया और मैं उसके घर पहुंच गई। मैंने उसके पैरेंट्स को सबकुछ बता दिया और उसके पिता को अपने साथ टैक्सी में लेकर निकल गई और उन्हें दिखाया कि उनकी बेटी क्या कर रही है। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या आप जासूस हैं? बस इसके बाद से मेरे मन में जासूस बनने का ख्याल आया।”

 

ग्रैज्युएशन पूरी करने के बाद रजनी पंडित ने एक शॉर्ट टर्म जॉब की। इस नौकरी के दौरान उन्होंने अपने एक साथी की मदद की और उसके बाद ही अपने जासूसी के पैशन को फुल टाइम करियर बना लिया।

 

 

करीब 25 सालों से जासूसी का काम कर रही रजनी का मानना है कि पहले के मुकाबले अब जासूस का काम आसान हो गया है, क्योंकि अब अच्छी क्वालिटी के रिकॉर्डर, स्पाई कैमरे आदि उपलब्ध है। भले ही भारत की इन पहली महिला जासूस को करोड़ों रूपए की सैलरी न मिलती हो, मगर हर केस सॉल्व करने के बाद उन्हें आत्मसंतुष्टी की जो अनुभूति है वो सबसे बढ़कर है। वह कहती हैं-

“मैं हर दिन 14 घंटे काम करती हूं और ८ से10 लाख सालाना कमा लेती हूं, जो मेरे लिए पर्याप्त हैं। मैं इस पेशे में नाम, शौहरत और पैसे के लिए नहीं आई हूं। मैं सिर्फ जितना हो सके ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद करना चाहती हूं”


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