आ गई नेत्रहीनों के लिए पहली विशेष ट्रेन; मैसूर और वाराणसी के बीच दौड़ेगी

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Updated on 31 Jan, 2016 at 4:30 pm

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नेत्रहीन यात्रियों के सफ़र को आसान बनाने के उद्देश्य से मैसूर और वाराणसी के बीच विशेष ट्रेन का परिचालन आज से शुरू होगा। भारतीय रेल की यह महात्वाकांक्षी परियोजना तीन चरणों में पूरी हुई है।

यह भारत की पहली ट्रेन है जो ब्रेल-पद्धति से युक्त है और नेत्रहीन यात्री इसका इस्तेमाल बखूबी कर सकते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार मैसूर -वाराणसी एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन मंगलवार और गुरुवार को चलेगी।

इस ट्रेन के कोचों के अंदर ब्रेल पद्धति को ध्यान में रख कर धातु के पहचानसूचक लगे हैं। इस पहचानसूचक से नेत्रहीन यात्रियों को अलार्म पुल चेन, शौचालय, आपातकालीन खिड़कियां और बर्थ संख्या आदि ढूंढने में आसानी होगी।


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इस परियोजना को वित्तीय मदद मैसूर के सांसद प्रताप सिम्हा दे रहे हैं।

मैसूर-वाराणसी एक्सप्रेस के संबंध में मंडल रेल प्रबंधक राजकुमार लाल कहते हैंः

“मैनें कई नेत्रहीन लोगों को टिकट काउंटर, प्लेटफार्म, रेलवे कोच और सीटों के दिशा-निर्देश के लिए भटकते देखा है। सिर्फ़ २ लाख की लागत और दो महीने के समय मे एक बेंगलुरु की कंपनी की मदद से इस ट्रेन में ब्रेल साइनेज फिट किया गया है।”

दक्षिण-पश्चिम रेलवे ज़ोन मार्च के अंत तक ऐसी ही ट्रेनों को मैसूर से तलगूप्पा, मैसूर से तिरुपति, मैसूर से माइलटूतुराई तक उतारने का विचार कर रहा है।


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