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देश के 78 हजार भिखारी हैं 12वीं पास; 3 हजार ने कर रखा है प्रोफेशनल कोर्स।

Published on 1 January, 2016 at 4:36 pm By

आज़ाद भारत की एक ऐसी तस्वीर जो देश को झकझोर कर रख दे। देश में करीबन 3 लाख 72 हज़ार भिखारी हैं और इनमें 21 फीसदी से अधिक शिक्षित हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, देश में लगभग 78 हजार भिखारी ऐसे हैं, जो 12वीं पास है, जबकि 3 हजार भिखारियों ने प्रोफेशनल कोर्स कर रखा है। और तो और, कई अन्य भिखारियों ने तो ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की भी डिग्री ली हुई है।

ये आंकड़े 2011 की जनगणना की रिपोर्ट ‘पेशागत रूप से कोई काम नहीं करने वाले और उनका शैक्षिक स्तर’ में प्रकाशित हुए हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि शिक्षित होने के बावजूद लोग भीख मांग रहे हैं, जिसका कारण कम वेतन मिलना है।


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इस रिपोर्ट में प्रकाशित आंकड़े बताते हैं कि लोगों का भिखारी बनना उनकी अपनी पसंद नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी है।

उनका कहना है कि पढ़े-लिखे होने के बावजूद उन्हें अपनी शैक्षिक योग्यता के अनुसार काम नहीं मिलता। अगर मिलता है तो उसमें कम पैसा मिलता है, जिससे परिवार का गुजर-बसर नहीं हो पाता। ऐसे में उन लोगों को भीख मांगना ही एकमात्र विकल्प लगता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकतर मामलों में इन्सान के हालात उसे ऐसा करने के लिए मजबूर कर देते हैं। 12वीं तक की पढ़ाई कर चुके 45 साल के दिनेश खोधाभाई कहते हैंः

“मैं गरीब हूं, लेकिन मैं एक ईमानदार इंसान हूं। मैं भीख मांगता हूं, क्योंकि इससे मुझे नौकरी की तुलना में ज्यादा पैसे मिल जाते हैं। मैं रोजाना लगभग 200 रुपए तक कमा लेता हूं। इससे पहले मैं एक अस्पताल में वॉर्ड बॉय था, लेकिन वहां मेरी तरख्वाह रोजाना केवल 100 रुपए ही थी।”



यह कहानी सिर्फ एक व्यक्तित की नहीं है। कई अन्य ऐसे हैं जो शिक्षित होने के बावजूद भीख मांगते है। भिखारियों के लिए कार्यरत एक गैर सरकारी संगठन ‘मानव साधना’ के संस्थापक बिरेन जोशी कहते हैंः

“भिखारियों का पुनर्वास करना काफी मुश्किल है। भीख में उन्हें आसानी से पैसा मिल जाता है। लालच उन्हें बड़ी आसानी से भीख मांगने की ओर खींच ले जाता है।”

एक ओर जहाँ लोग शिक्षित है लेकिन फिर भी उन्हें काम, और शैक्षिक योग्यता के अनुसार पैसा नही मिलता। वहीँ दूसरी ओर ऐसे भी है जिनका जीवन भले ही गरीबी में क्यों न गुजरा हो, दो वक़्त की रोटी नसीब नहीं हुई हो, फिर भी उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अपनी तक़दीर खुद लिखी।


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शैक्षिक योग्यता होना ज़रूरी है पर साथ ही साथ उस योग्यता को प्रतिभा में तब्दील करने का जज़्बा भी होना उतना ही ज़रूरी है। 12वीं करों, बी.ए. या फिर एम.ए., इनके साथ-साथ किसी हुनर का होना जरूरी होता है।

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