देश का ऐसा जिला जहां के 65 गांवों में सालों से नहीं हुआ एक भी अपराध

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Updated on 3 Jan, 2017 at 2:47 pm

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इसमें कोई शक़ नही है कि दिन-प्रतिदिन अपराध और अपराधियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ़ 2014 में भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत लगभग 28.5 लाख संज्ञेय अपराध के मामले दर्ज़ हुए और लगभग 43.7  लाख अपराध स्थानीय एवं विशेष कानूनों के तहत मामले सामने आए। जहां गंभीर अपराधों में लगातार वृद्धि से पुलिस व नीति निर्धारकों की साख पर सवाल उठते हैं, वहीं अपने देश में एक जिला ऐसा है जिसके 65 गांवों में आपराधिक घटना नहीं हुईं।

जी हां, राजस्थान के डूंगरपुर जिले में 12 पुलिस थाना क्षेत्रों में 65 गांव एेसे भी हैं, जहां बीते तीन वर्षों वर्ष 2013 से 2015 में एक भी आपराधिक घटना नहीं हुई है।

राज्य सरकार की ओर से नवम्बर, 2015 से जुलाई, 2016 के मध्य अपराधविहीन गांवों की सूची तैयार की गई थी। इसके लिए पुलिस प्रशासन की ओर से शनिवार को पंचायत समिति के सभागार में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में अपराधविहीन गांव बनाने में सहयोग देने पर ग्राम पंचायत के प्रधान रेखा रोत सहित सरपंच एवं सचिवों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।

रेखा के अनुसार जब कभी भी इन गांवों में कोई छोटा-मोटा विवाद होता है, तो इसे स्थानीय स्तर पर बातचीत कर के सुलझा लिया जाता हैं। इस वजह से मामला थाने या कचहरी तक नहीं जाता। यही कारण है कि अपराधविहीन गांवों के रूप में यह जिले और देश के अन्य गांवों के लिए एक मिसाल बनता जा रहा है।

सबके सहयोग से अभियान में मिली सफलता


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इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामजीलाल चन्देल थे। उनके अनुसार इन 65 गांवों को अपराधविहीन बनाने में सबकी अहम भूमिका रही है। इस अभियान में पुलिस, सीएलजी सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने मिलकर अथक प्रयास किया।

इसके फलस्वरूप पुलिस बीट कांस्टेबल, बीट प्रभारी, थाना प्रभारी तथा अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की तरफ से समय-समय पर इन गांवों के लोगों के साथ लगातार सम्पर्क कर बैठकें सफल हुई। इसके बाद लोगों को जागरूक करने के लिए इस अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

इन बैठकों और कार्यक्रमों के द्वारा ग्रामीणों को सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा दी गई। विद्यालयों में भी आवश्यक जानकारी दी गई। युवाओं को भी जागृत किया गया। उन्हें बाल विवाह, मौताणा, नाता प्रथा जैसी सामाजिक कुप्रथाओं तथा समाज पर पडऩे वाले विपरीत प्रभावों से अवगत कराने से नवचेतना का संचार हुआ।

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