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100 साल पहले शहीद हुए भारतीय सैनिकों का अब जाकर हुआ अंतिम संस्कार

9:42 am 28 Nov, 2017

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यह हैरान करने वाला वाकया है कि आखिर 100 साल बाद किसी का अंतिम संस्कार करने का क्या मतलब? आखिर क्या बात हो सकती है कि इतने सालों बाद भारतीय सैनिकों का अंतिम संस्कार किया गया, वह भी फ्रांस में। दो भारतीय सैनिकों के शव फ्रांस के पास थे और उन्होंने ऐसा फैसला लिया।

दरअसल, उत्तर फ्रांस के एक छोटे से गांव की घटना है, जहां एक ख़ास कार्यक्रम में दो भारतीय सैनिकों का अंतिम संस्कार किया गया। 2016 में एक नाले के मरम्मत के समय दो सैनिकों के शव मिले थे। इनकी वर्दी पर लिखे ’39’ से उनकी पहचान हुई, जो कि 39 रॉयल गढ़वाल राइफ़ल्स की उस रेजिमेंट में रहते हुए प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस में युद्ध में भाग लिया था।

उक्त सैनिक रेजिमेंट आज भी भारत में है, जिनसे फ्रांस ने संपर्क कर इस बावत जानकारी दी। सैनिकों के अंतिम संस्कार के लिए बकायदा हिन्दू पुजारी बुलाए गए थे। भारतीय और फ्रांसीसी सैनिकों ने इन दोनों सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। अंतिम संस्कार के समय गढ़वाल राइफ़ल रेजिमेंट के कमांडेंट ब्रिगेडियर इंद्रजीत चटर्जी भी उपस्थित थे।


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इस अनोखे कार्यक्रम के लिए भारत से एक छोटी-सी टीम फ्रांस पहुंची थी और गढ़वाल राइफ़ल्स रेजिमेंट बैंड के दो बैगपाइपर्स ने औपचारिक धुन बजाकर सैनिकों को आख़िरी सलामी दी गई। सैनिकों के शव मिलने की जगह से कुछ मिट्टी भारत लाई जाएगी। प्रथम विश्व युद्ध में 10 लाख से अधिक भारतीय सैनिक ब्रिटेन की ओर से लड़े थे।

अब जब प्रथम विश्वयुद्ध में भारत के बलिदान का साक्ष्य मिटाया जा रहा है, फ्रांस में अब भी भारतीय सैनिकों की भूमिका को याद किया जा रहा है। लावेन्टी में इसको लेकर एक स्मारक भी बनाया गया है, जिसमें भारतीय सैनिकों के नाम लिखे हैं। ये सैनिक ब्रिटिश राज के लिए युद्ध लड़ते वक्त मारे गए थे। हर साल रिमेम्बरेंस संडे के दिन इन सैनिकों को स्मरण किया जाता है।

फ्रांस आए सैनिकों के दल में भारत के राइफ़लमैन गब्बर सिंह नेगी के पोते भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए, जो भारतीय सेना में कार्यरत हैं। नेगी को युद्ध में अपनी भूमिका के लिए विक्टोरिया क्रॉस से नवाजा गया था। स्मारक पर पहुंचने वाले भारतीय रंजीत सिंह के अनुसार, ये प्रवासी भारतीयों के लिए खासा महत्वपूर्ण है जो इतिहास को संजोये हैं।

बताते चलें कि फ्रांस के लोग प्रत्येक वर्ष न्यूवे चैपल के स्मारक पर जमा होकर युद्ध के शहीदों को स्मरण करते हैं।

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