1 कार, 3 महिलाएं और 17 देशों का रोड ट्रिप; दिल्ली से लंदन की यह यात्रा वाकई लाजवाब रही।

author image
Updated on 4 Dec, 2015 at 12:31 pm

Advertisement

अब तक हम कहावत सुनते आ रहे थे कि उम्र तो एक संख्या भर है। इसे सच साबित कर दिखाया है तीन महिलाओं ने।

रश्मि कोप्पर, डॉ. सौम्या गोयल और निधि तिवारी ने 17 देशों का फासला तय करते हुए दिल्ली से लंदन तक की यात्रा एक कार में तय की।

यह रोमान्चक सुझाव था निधि का, जो इस पूरे अभियान के दौरान कार ड्राइव करती रही थी। निधि एक ड्राइविंग एक्सपर्ट के रूप में काम करती हैं और गाड़ी ड्राइव करना उनका शगल है।

उन्होंने जब पहली बार डॉ. सौम्या गोयल और रश्मि कोप्पर से इस बारे में बात की तो वे दोनों तुरन्त इसके लिए तैयार हो गईं। करीब 15 साल पुराने सपने को साकार करने के लिए उन्होंने अपने-अपने काम से कुछ दिनों की छुट्टी लेने की सोची। रश्मि गोयल होटल मैनेजमेन्ट प्रोफेसर हैं, जबकि डॉ. सौम्या गोयल फिजिकल थेरेपिस्ट।


Advertisement

इस सपने को पूरा करने में आड़े आ रहा था फंड। उन्हें जरूरत थी एक स्पॉन्सर की, जो इस पूरी यात्रा का खर्च उठा सके। कहते हैं, जब इरादे बड़े हों तो कुछ भी कर सकते हैं।

इन तीनों दोस्तों के यात्रा अभियान का खर्च उठाया एक भारतीय कार निर्माता कम्पनी ने। इसी कम्पनी ने उन्हें एक एसयूवी गाड़ी उपलब्ध कराई, ताकि वे दिल्ली से लंदन की यात्रा कर सकें।

और इस तरह शुरू हुई यात्रा

शुरूआत हुई जून महीने में दिल्ली से। म्यांमार, चीन, किर्गिस्तान, उजबेकिस्तान, कजाखस्तान, रूस, युक्रेन, पोलैन्ड, चेक रिपब्लिक, जर्मनी, बेल्जियम और फ्रान्स होते हुए उनकी कार लंदन शहर तक अक्टूबर महीने में पहुंची।

यात्रा का विवरण कुछ इस तरह है।

1 से 7 दिनः दिल्ली – कानपुर – सिलीगुड़ी – गुवाहाटी – इम्फाल – मोरेह बोर्डर प्वाइन्ट (म्यांमार) – मोनिवा (दूरीः 2,403 किलोमीटर)

8 से 14 दिनः मोनिवा – मन्डाले – ल्हासा – म्यूज – रुइली – डाली – जीचांग – चेंग्दू (दूरीः 1903 किलोमीटर)

15 से 21 दिनः चेंग्दू – रूएर्गई – जीनींग – जीयायुगुआन – हामी – तरपन – कुएरले (दूरीः 3, 520 किलोमीटर)



22 से 28 दिनः कुएरले – अकेसु – काशगर – सरी ताश (किरगिजस्तान) – ओश – ताशकंद – समरकंद – बुखारा (दूरीः 1964 किलोमीटर)

29 से 35 दिनः बुखारा – खिवा – नुकुस (कजाखस्तान) – बेन्यू – अतिराउ – अस्त्राखान (रूस) – वोल्वोग्राद (दूरीः 2, 352 किलोमीटर)

36 से 42 दिनः वोल्वोग्राद – कमेन्सक – खारकिव – कीव (युक्रेन) – लीव – कारको (पोलैन्ड) – प्राग (चेक रिपब्लिक) (दूरीः 2,589 किलोमीटर)

43 से 54 दिनः प्राग – फ्रैंकफुर्त (जर्मनी) – ब्रसेल्स (बेल्जियम) – लंदन (यूके) (दूरीः 1269 किलोमीटर)

टीम ने एक दिन में 600 किलोमीटर का फासला तय किया।

रश्मि कोप्पर और डॉ. सौम्या गोयल कहती हैं।

किसी भी नए देश में जाकर हमारा सबसे पहला काम होता था, एक लोकल मोबाइल सिम कार्ड खरीदना। हमारे लिए कोई स्थान पहले से बुक कर रखना संभव नहीं था, क्योंकि हमारा शेड्यूल तय नहीं होता था। सबसे बड़ी बात कि भारत और इंग्लैन्ड में हम अंग्रेज में बोले। बाकी देशों में हमने गूगल ट्रान्सलेट की मदद ली।

इस टीम के सदस्यों का कहना था कि वह समाज के महिलाओं को एक संदेश देना चाहती हैं कि अगर ठान लिया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है।

इस तरह के अभियान में सावधानी जरूरी है। रात में गाड़ी ड्राइव करने से बचना चाहिए।

facebook

facebook


Advertisement

Tags

आपके विचार


  • Advertisement