सिर्फ 50 यात्रियों के लिए बिहार की यह ट्रेन दिन में लगाती है 4 चक्कर

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Updated on 8 Mar, 2016 at 1:01 pm

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आपको यह हेडलाइन पढ़कर आश्चर्य हो रहा होगा, लेकिन यह सच है। जी हां, दीघा से पटना के बीच 9 किलोमीटर के रेलवे रूट पर एक पैसेन्जर ट्रेन दिन में चार चक्कर लगाती है, लेकिन आश्चर्यनजनक रूप से इसमें सिर्फ 50 के लगभग यात्री ही होते हैं।

भारतीय रेल दीघा घाट से पटना घाट के बीच इस ट्रेन को वर्ष 2004 से चला रही है। 9 किलोमीटर की इस दूरी के लिए किराया है 12 रुपए। भारतीय रेल को एक ट्रिप में करीब 1 हजार रुपए की कमाई होती है।

1862 में इस रूट पर ब्रिटिश रेलवे ने परिचालन शुरू किया था। सत्तर के दशक के अन्त में रेलवे ने घाटे में चल रही इस रूट को बंद कर दिया। बाद में वर्ष 2004 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इस रूट पर एक बार फिर ट्रेनों का परिचालन शुरू किया। इस ट्रेन का उपयोग आम तौर पर सब्जी विक्रेता, दूध विक्रेता आदि करते हैं।

टाइम्स ऑफ इन्डिया ने पूर्व मध्य रेलवे के एक अधिकारी के हवाले से कहा हैः

“देश में कई सारे रेल रूट्स मौजूद हैं, जहां रेलवे समाजिक प्रतिबद्धताओं की वजह से ट्रेनों का परिचालन करती है। यहां भी ऐसा ही किया जा रहा है।”


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वर्ष 2005 में बिहार में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान इस पर बात की गई थी कि 4-लेन हाईवे के लिए रेलवे को अपनी ज़मीन देनी चाहिए, ताकि वर्ष 2013 तक सड़क पर ट्रैफिक कम किया जा सके। लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका है और इस रूट पर ट्रेनें पहले की तरह चल रही हैं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2012 में कुछ तकनीक विशेषज्ञों ने इस रूट पर ट्रेन परिचालन को बंद करने संबंधी योजना से असहमति दिखाई थी। तब ऐसा कहा गया था कि पटना में सड़क यातायात को दुरुस्त करने की संभावना नहीं है, इसलिए रेलवे लाईन एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

अभी हाल ही में एक खबर आई थी कि जापान में समाजिक प्रतिबद्धता के तहत जापानी रेलवे सिर्फ एक स्कूल छात्रा के लिए ट्रेन का परिचालन करती है।

जापान की सरकार इस रूट पर रेल यातायात बन्द करना चाहती थी, लेकिन जब उन्हें पता चला कि यहां एक छात्रा इस ट्रेन का नियमित इस्तेमाल करती है तो उन्होंने अपनी योजना बदल दी। अब इस ट्रेन को तब तक चलाया जाएगा, जब तक कि उस छात्रा की पढ़ाई खत्म न हो जाए।

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