इस शख्स ने देश को दी ISRO जैसी संस्था, 28 साल की ही उम्र में हासिल किया बड़ा मुकाम

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Updated on 12 Aug, 2018 at 3:00 pm

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भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले विक्रम साराभाई के प्रयासों का ही नतीजा है कि हमारे देश के पास आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जैसी विश्व स्तरीय संस्था है।

 

 


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12 अगस्त 1919 में जन्मे डॉ. विक्रम ने 28 साल की ही उम्र में 11 नवंबर, 1947 को अहमदाबाद में  भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) की नींव रखी।

 

डॉ. विक्रम ने होमी भाभा की मदद से तिरुवनंतपुरम में देश का पहला रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन बनाया। वहीं, अहमदाबाद में स्थित अन्य उद्योगपतियों के साथ मिल कर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट (IIM), अहमदाबाद और फिजिक्स रीसर्च लेबोरेटरी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

वह डॉ. साराभाई ही थे, जिन्होंने भारतीय उपग्रहों के संविरचन और प्रमोचन के लिए कई परियोजनाओं की शुरुआत की।



यह उनके ही प्रयासों का फल था कि प्रथम भारतीय उपग्रह, आर्यभट्ट, रूसी कॉस्मोड्रोम से 1975 में कक्षा में स्थापित किया जा सका।

 

डॉ विक्रम ने अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व पर जोर देते हुए कहा था:

 “ऐसे कुछ लोग हैं जो विकासशील राष्ट्रों में अंतरिक्ष गतिविधियों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हैं। हमारे सामने उद्देश्य की कोई अस्पष्टता नहीं है। हम चंद्रमा या ग्रहों की गवेषणा या मानव सहित अंतरिक्ष-उड़ानों में आर्थिक रूप से उन्नत राष्ट्रों के साथ प्रतिस्पर्धा की कोई कल्पना नहीं कर रहें हैं। लेकिन हम आश्वस्त हैं कि अगर हमें राष्ट्रीय स्तर पर और राष्ट्रों के समुदाय में कोई सार्थक भूमिका निभानी है, तो हमें मानव और समाज की वास्तविक समस्याओं के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों को लागू करने में किसी से पीछे नहीं रहना चाहिए।”

 

 

डॉ. विक्रम को भारत सरकार द्वारा 1966 में पद्मभूषण और 1972 में पद्मविभूषण से नवाजा गया।


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