इन देसी खेल के बारे में जानकर आप तुरंत बचपन में लौट जाना चाहेंगे

Updated on 13 Feb, 2018 at 6:55 pm

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खेल हर बच्चे की ज़िंदगी का अहम हिस्सा होता है। 80 और 90 के दौर में जब मोबाइल और विडियो गेम्स नहीं थे, तब बच्चे साथ मिलकर बहुत दिलचस्प खेल खेला करते थे, मगर आजकल के बच्चे बाहर जाकर खेलने की बजाय मोबाइल पर गेम्स खेलना पसंद करते हैं जिससे कई तरह की बीमारियां हो रही हैं। आज हम आपको कुछ देशी खेलों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे देखकर शायद आपको भी अपना बचपन याद आ जाएगा।

पिट्टो

 

आपने भी अपने बचपन में ये गेम ज़रूर खेला होगा। इसमें छोटे-छोटे पत्थरों को एक के ऊपर एक अरेंज कर दिया जाता है और दो टीम बनाई जाती हैं। फिर खिलाड़ी बॉल से जमाए हुए पत्थर को गिराता है. एक टीम बॉल पकड़ने के लिए भागती और दूसरी टीम का काम होता बॉल पकड़ में आने से पहले फिर पत्थरों को पहले की तरह जमाना।


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लंगड़ी टांग

 

एक टांग पर कूदते हुए आपने भी कई लोगों को आउट किया होगा। जी हां, इस खेल में मैदान या कहीं भी खाली जगह पर कई चॉक या फिर ईंट के टुकड़े से खाने बनाए जाते हैं। फिर पत्थर को एक टांग पर खड़े रहकर सरकाना पड़ता है, वो भी बिना लाइन को छुए हुए। अंत में एक टांग पर खड़े रहकर इसे एक हाथ से बिना लाइन को छुए उठाना पड़ता है। कुछ याद आया आपको?

कंचे

 

यह लड़कों का फेवरेट गेम हुआ करता था। आज भी गांव के बच्चे ये खेलते हैं। इस खेल में मार्बल्स की गोलियों जिसे कंचे कहते हैं, से बच्चे खेलते हैं। इसमें एक गोली से दूसरी गोली को निशाना लगाना होता है और निशाना लग गया तो वह गोली आपकी हो जाती है। इसके अलावा एक गड्ढा बनाकर उसमें कुछ दूरी से कंचे फेंके जाते हैं। जिसके कंचे सबसे ज्यादा गड्ढे में जाते हैं वह जीत जाता है।

गिली डंडा

 

क्रिकेट के मशहूर होने से पहले कंचे के बाद यही लड़कों का पसंदीदा खेल हुआ करता था। खासतौर पर गांव में ये खेल बहुत मशहूर है। इस खेल में गिल्ली एक स्पिंडल के आकार की होती है और साथ में होता है एक छोटा सा डंडा। गिल्ली के एक सिरे को डंडे से मारा जाता और गिल्ली को जहां तक हो सके, फेंका जाता है। जो जितनी दूर तक फेंक सके, उसी के आधार पर स्कोर तय होता है।

चोर-सिपाही

 

शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने ये खेल नहीं खेला होगा। स्कूल में लंच टाइम में या जब टीचर थोड़ी देर से आएं, तो बच्चे तुरंत ये गेम खेलना शुरू कर देते थे। इसमें दो टीमें खेलती हैं। एक टीम पुलिस बनती है तो दूसरी चोर। फिर पुलिस चोरों की तलाश में रहती है। जब पुलिस एक-एक करके सभी चोर पकड़ लेती है, तो फिर गेम उल्टा हो जाता है यानी अब चोर पुलिस बन जाते हैं और पुलिस चोर।


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