हिन्द महासागर में सिर्फ भारत की चलेगी, ताकत बढ़ा रही है इंडियन नेवी

8:15 pm 25 Oct, 2017

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भारतीय नौसेना ने हिन्द महासागर क्षेत्र में चीन के प्रभाव को रोकने के लिए अपनी ताकत बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।

हिन्द महासागर के समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर चौकसी बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। फारस की खाड़ी से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक अब नौसेना के युद्धपोत दिन-रात गश्ती करेंगे, जिससे समुद्री उपद्रवों को रोका जा सके। नौसेना के इस कदम से समुद्री आतंकवाद, लूट की घटनाओं से निपटने के साथ ही अन्य आपदाओं का सामना किया जा सकेगा।

फिलहाल 12 से 15 विध्वंसक, युद्धपोत और बड़े गश्ती जहाज हिन्द महासागर में गश्त लगा रहे हैं। इसमें रुक्मिणी (जीएसए-7) सैटलाइट की मदद भी ली जा रही है। हिन्द महासागर में नौसेना की क्षमता को और भी बढ़ाने पर विचार हो रहा है।

हाल के दिनों में हिन्द महासागर में चीन अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, भारत इसके लिए तैयार है।

हिन्द महासागर में हम चीन को चुनौती देने में कितना सक्षम हैं, इसके बारे में सवाल उठ खड़े हो रहे थे।


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इससे पहले हमने खबर प्रकाशित की थी कि भारत अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह पर स्थित अपने मिलिट्री बेस को आधुनिक बना रहा है और साथ ही इसका विस्तार भी किया जा रहा है। मिलिट्री बेस का विस्तार एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत किया जा रहा है। यही वजह है कि केन्द्र सरकार ने रिटायर्ड नेवी चीफ एडमिरल डी के जोशी को यहां के उपराज्यपाल पद की जिम्मेदारी दी है।

अंडमान एवं निकोबार द्वीप का सामरिक महत्व है। यहां पर भारतीय नौसेना की बड़ी मौजूदगी से इलाके की सुरक्षा में सहूलियत होगी और हिन्द महासागर पर नजर रखी जा सकेगी।

‘ऐक्ट ईस्ट’ पॉलिसी पर है नजर

भारत फिलहाल जापान के साथ-साथ सिंगापुर, विएतनाम, म्यांमार, थाईलैंड, मलयेशिया और इंडोनेशिया जैसे एशियाई देशों के साथ सैन्य संबंध मजबूत करने का काम कर रहा है।

हिन्द महासागर पर नजर रखने में ये सैन्य संबध कारगर साबित होंगे।

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