भारतीय नौसेना के खेमे में शामिल हुई ‘तारिणी’, अब समुद्र देखेगा ‘भारतीय नारी’ की ताकत

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Updated on 19 Feb, 2017 at 5:13 pm

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गहरे समंदर में उतर सकने वाली सेलबोट यानी नौकायन पोत ‘तारिणी’ को भारतीय नौसेना ने अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा की उपस्थिति में इसे नौसेना में शामिल किया गया। इस नौका के भारतीय नौसेना में शामिल होने से नौसेना की शक्ति बढ़ गई है।

ओडिशा के लोकप्रिय तारा तारिणी मंदिर के नाम पर इस नौकायन पोत का नाम ‘तारिणी’ रखा गया है। संस्कृत में तारिणी का अर्थ नौका के अलावा पार लगाने वाली भी होता है।

महादेई के बाद ‘तारिणी’ नौसेना का दूसरा नौकायन पोत है। नौसेना की महिला टीम दुनिया का चक्कर लगाने के अभियान पर इसी बोट में निकलेगी। यह बेहद चुनौतीपूर्ण अभियान अगस्त 2017 में शुरू किए जाने की उम्मीद है।

भारतीय नौसेना द्वारा जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि ‘तारिणी’ पालनौका महिला दल के लिए बेहद उपयोग होगी और महिला दल इसके माध्यम से विश्व का भ्रमण करेगी। लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी के नेतृत्व में छह महिला अफसरों की टीम इस अभियान के लिए चुनी गई है।

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नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा के साथ नौसेना की महिला टीम Twitter

तारिणी की खासियत


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अत्याधुनिक सेटेलाइट सिस्टम से लैस ‘तारिणी’ से दुनिया के किसी भी हिस्से में संपर्क किया जा सकता है। INSV तारिणी का निर्माण गोवा की मैसर्स एक्वेरियस शिपयार्ड प्राइवेट लिमिटेड, दिवर ने किया है।

इसे बनाने में फाइबर ग्लास, एल्युमिनियम और स्टील जैसी धातुएं इस्तेमाल की गई हैं। इस बोट में मुश्किल से मुश्किल हालात में भी सफर तय करने की ताकत है।

पिछले ही साल मार्च में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने ‘तारिणी’ के निर्माण का ऐलान किया था। वहीं इस पर कार्य करते हुए ‘तारिणी’ के सारे ट्रायल इसी साल 30 जनवरी को सफलपूर्वक पूरे हो गए थे।  तारिणी के तय सीमा से पहले बनकर तैयार हो जाने को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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