पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं हैं भारत से गए मुसलमान, अब इस पाक नेता ने नरेन्द्र मोदी से की बचाने की अपील

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Updated on 29 Mar, 2017 at 5:27 pm

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बंटवारे के बाद भले ही बड़ी संख्या में भारतीय मुसलमान पाकिस्तान चले गए, लेकिन उन्हें पाकिस्तान में वह दर्जा कभी नहीं दिया गया, जो वहां पहले से रह रहे लोगों को मिला हुआ है।

भारत से जाने वाले मुसलमान वहां मुुहाजिर यानी शरणार्थी कहलाए। मुहाजिर लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए लड़ते रहे हैं।

अब मुहाजिरों के लिए आवाज उठाने वाली पार्टी मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के नेता अल्ताफ हुसैन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुहाजिरों के पक्ष में बोलने की अपील की है। फिलहाल लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे अल्ताफ हुसैन ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा है कि वे उन लोगों के पक्ष में अपनी बात रखें जो सदियों तक भारत में रहे थे। अल्ताफ हुसैन कहते हैं कि उनके पुरखों ने बड़ी गलती की थी जो पाकिस्तान चले गए। अल्ताफ का मानना है कि वह भले ही पाकिस्तान में पैदा हुए, लेकिन उन्हें कभी इस धरती का लाल नहीं माना गया। MQM पाकिस्तान की चौथी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है।

MQM जिसे मुहाजिर कौमी मूवमेंट भी कहा जाता है, के नेता अल्ताफ हुसैन का कहना हैः


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“मैं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी शिकायत दर्ज कराना चाहूंगा कि श्रीमान् मोदी, मुझे यह कहते हुए अफसोस है कि आप बलूचिस्तान के लोगों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की नृशंसता को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अपने लोगों के पक्ष में कभी आवाज नहीं उठाई जो सदियों तक भारत में रहे थे।”

अल्ताफ हुसैन ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि उन्हें पाकिस्तान के कराची में अपने ही लोगों उर्दू भाषी मुहाजिरों के खिलाफ पाकिस्तानी प्रतिष्ठान, सेना और अर्धसैनिक बलों द्वारा ढाए जा रहे कहर के विरूद्ध अपनी आवाज उठानी चाहिए थी। हुसैन ने भारत से उसके मुद्दों को सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों एवं मानवाधिकार मंचों पर उठाने का आह्वान किया है।

इस बीच, पाकिस्तान के कराची और हैदराबाद में स्थित अल्ताफ हुसैन यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की कवायद चल रही है। पाकिस्तान सरकार उन सभी प्रतिष्ठानों के नाम बदलना चाहती है, जो MQM नेता अल्ताफ हुसैन के साथ जुड़े हुए हैं।

इन दोनों विश्वविद्यालयों की आधारशिला वर्ष 2014 में पाकिस्तान के बड़े रीयल स्टेट व्यवसायी मलिक रियाज द्वारा रखी गई थी।

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