इस भारतीय ने खुद को ‘नए देश का राजा’ घोषित कर दिया है

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Updated on 15 Nov, 2017 at 6:09 pm

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इंदौर के रहने वाले सुयश दीक्षित ने सूडान और मिस्त्र के बीच 800 वर्ग मील के क्षेत्र पर अपना झंडा लगाकर उसे ‘किंगडम ऑफ दीक्षित’ घोषित कर दिया है। आपको बता दें कि इस जमीन पर किसी भी देश ने अब तक अपना दावा पेश नहीं किया है।

दरअसल, बीर ताविल नाम का यह इलाका मिस्त्र और सूडान के बीच में पड़ता है, जो किसी देश के भीतर नहीं आता। इस जमीन पर न तो मिस्त्र दावा करता है और न ही सूडान। 1899 में ब्रिटिशों द्वारा सीमा के निर्धारण के बाद यह दुनिया का ऐसा इलाका बन गया, जिस पर किसी देश का दावा नहीं है। खबरों के मुताबिक, ये इलाका बंजर और पूरी तरह रेगिस्तानी है, जो मिस्त्र और सूडान की दक्षिणी सीमा से सटा हुआ है।

इस जगह के बारे में सुयश ने पहले से ही जानकारी इकट्ठा की हुई थी। पूरी रणनीति के साथ उन्होंने वहां तक का सफर तय किया और पहुंचते ही झंडा फहराकर खुद को वहां का राजा घोषित कर दिया।

उन्होंने इसकी राजधानी का नाम सुयशपुर रखा है और अपने पिता को प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष बनाया है।

Suyash-Dixit

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सुयश इस जगह पर अपनी दावेदारी को लेकर कितने गंभीर है इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि उन्होंने इस देश का नाम ‘किंगडम ऑफ दीक्षित’ रखते हुए संयुक्त राष्ट्र तक में अपनी दावेदारी भेज दी है। उन्होंने खुद को इस गैर दावाग्रस्त इलाके का राजा बताया है और संयुक्त राष्ट्र से उनके नए देश को मान्यता देने की बात कही है।

सुयश के लिए इस ‘नोमेंस लैंड’ में जाना आसान नहीं था। सुयश ने ये पूरा काम योजना के तहत किया। ये जगह आतंकियों से ठिकानों से घिरी हुई है जिसके कारण यहां जाने के लिए सुयश को पुलिस की अनुमति लेनी पड़ी। दरअसल, इस जगह पर आंतकियों के ठिकानों के होने की वजह से पुलिस को किसी को देखते ही गोली मारने के आदेश हैं। पुलिस की कई शर्तों को मानने के बाद वह आखिरकार अपनी जान जोखिम में डालकर यहां पहुंचे।

उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए 319 किलोमीटर की दूरी तय की और देश घोषित करने के लिए सभी जरूरी नियमों का अध्ययन किया।

सुयश ने फेसबुक पर खुद को राजा घोषित करते हुए कहाः



“मैंने यहां तक पहुंचने के लिए 319 किलोमीटर का सफर तय किया है। जब मैं इजिप्ट से निकला तो वहां शूट एंड साइट के ऑर्डर थे। मैं बड़ी मुश्किल से वहां से निकलकर यहां पहुंचा। यहां आने के लिए सड़क भी नहीं थी। ये इलाका पूरा रेगिस्तान से भरा है। यहां 900 स्क्वायर फीट का इलाका किसी देश का नहीं है। यहां आराम से रहा जा सकता है। मैंने यहां पौधे लगाने के लिए बीज डालकर पानी डाला है।”

 

 

इतना ही नहीं सुयश ने एक वेबसाइट बनाकर लोगों से इस देश की नागरिकता लेने का आवदेन करने को भी कहा है।

इंदौर के रहने वाले सुयश ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान से पढ़ाई की है। वह गूगल डेवलपर्स ग्रुप इंदौर के कम्यूनिटी लीडर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के साथ भी काम किया और वर्तमान में वे सॉफ्टीनेटर कंपनी में सीईओ का पदभार संभाल रहे हैं।


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