देश मना रहा है सशस्त्र सेना झंडा दिवस, जानिए क्या है इतिहास

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11:56 am 7 Dec, 2016

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आज के दिन यानी सात दिसंबर को सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया जाता है। झंडा दिवस यानी देश की सेना के प्रति सम्मान प्रकट करने का दिन। उन जांबाज सैनिकों के प्रति एकजुटता दिखाने का दिन, जो देश की तरफ आ रही हर मुश्किल, हर मुसबीत को हंसते हुए सामना किया और देश पर आंच तक नहीं आने दी।

यह उन जांबाज सैनिकों को सम्मान प्रकट करने का दिन होता है, जो देश की तरफ आंख उठाकर देखने वालों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। सेना में रहकर जिन्होंने न केवल सीमाओं की रक्षा की, बल्कि आतंकवादी व उग्रवादी से मुकाबला कर शांति स्थापित करने में अपना सब कुछ त्याग कर खुद को मां भारती के चरणों में न्यौछावर कर देते हैं।

ऐसे में पीछे छूट गए एक शहीद के परिवार का दर्द समझ पाना बहुत कठिन है। एक सैनिक को शहीद होने पर जो सरकार द्वारा पेंशन मिलती है, वो काफ़ी नहीं होती की परिवार सही से चल सके। इसलिए सरकार ने देश के सैनिकों की मदद करने के लिए यह अनोखी पहल सोची है।

सशस्त्र सेना झंडा दिवस का इतिहास


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पहली बार 23 अगस्त 1947 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की रक्षा समिति ने युद्ध दिग्गजों और उनके परिजनों के कल्याण के लिए सात दिसंबर को झंडा दिवस मनाने का फैसला लिया था। तब से लेकर यह सफ़र आज तक जारी है। इस दिन झंडे से होने वाली आय शहीद सैनिकों के आश्रितों के कल्याण में खर्च की जाती है।

इस दिन छोटे-छोटे झंडे जनता के बीच बांट कर दान अर्जित किया जाता है। जो राशि एकत्रित होती है, वह झंडा दिवस कोष में जमा कर दी जाती है। इस राशि का उपयोग युद्धों में शहीद हुए सैनिकों के परिवार या हताहत हुए सैनिकों के कल्याण व पुनर्वास में खर्च की जाती है। यह राशि सैनिक कल्याण बोर्ड की माध्यम से शहीदों के परिवार के कल्याण के लिए उपयोग की जाती है।

शुरुआत में इसे झंडा दिवस के रूप में मनाया जाता था, लेकिन 1993 से इसे सशस्त्र सेना झंडा दिवस का रूप दे दिया गया। तब से लेकर आज तक सात दिसंबर को देशवासियों द्वारा सेना के प्रति यह सम्मान प्रकट किया जाता है। देश के हर नागरिक को चाहिए कि वह झंडा दिवस कोष में अपना योगदान दें, ताकि शहीदों के आश्रितों के कल्याण के साथ-साथ हमारे देश का झंडा आसमान की ऊंचाइयों को छूता रहे।

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