जानिए कैसे गगनयान मिशन को दिया जाएगा अंजाम, महज 16 मिनट में अंतरिक्ष पहुंच जाएंगे तीन भारतीय

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Updated on 29 Aug, 2018 at 6:05 pm

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अंतरिक्ष में तीन भारतीयों को भेजने के मिशन पर सरकार और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) इसरो जोर-शोर से लग गई है। इस मिशन के तहत भारत 2022 तक तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी में है। इसके लिए ISRO ने रूपरेखा भी तैयार कर ली है। यह भारत का पहला मानवयुक्‍त अंतरिक्ष अभियान होगा। गगनयान नाम से शुरू होने वाले अंतरिक्ष अभियान में तीनों ही भारतीय अंतरिक्ष यात्री एक सप्‍ताह तक अंतरिक्ष में रहेंगे। गगनयान को पृथ्‍वी की सतह से 300-400 किमी की दूरी वाली कक्षा में स्‍थापित किया जाएगा। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्‍त को इस गगनयान मिशन की घोषणा की थी।

 

ISRO के प्रमुख के. सिवन ने राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मिशन पर खुलकर बातचीत की।

 

इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने कहाः

“इसरो साल 2022 तक गगनयान को लॉन्च कर देगा। यह देश का पहला ह्यूमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम होगा, जिसके लिए तीन भारतीयों का चयन किया जाएगा। वे तीनों लोग श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग के 16 मिनटों के भीतर ही अंतरिक्ष में पहुंचा दिए जाएंगे।”

 

ISRO Chairman K Sivan

ISRO के प्रमुख के. सिवन twitter

16 मिनट में अंतरिक्ष में पहुंचेगा

 

इसरो के मुताबिक सात टन वजनी, सात मीटर ऊंचे और करीब चार मीटर के व्‍यास की गोलाई वाले गगनयान को जीएसएलवी एमके3 के जरिये अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया जाएगा। प्रक्षेपित करने के बाद यह 16 मिनट में कक्षा में पहुंच जाएगा।  सिवन के मुताबिक, तीनों भारतीय अंतरिक्ष के लो अर्थ ऑर्बिट में पांच से सात दिन गुजारेंगे।

के. सिवन ने आगे बताया कि ऑर्बिटल मॉड्यूल के दो हिस्से होंगे। एक-क्रू मॉड्यूल, दूसरा-सर्विस मॉड्यूल। क्रू मॉड्यूल 3.7 मीटर व्यास में एक सर्कुलर क्यूबिकल जैसा होगा, जिसकी ऊंचाई 7 मीटर और वजन 7 टन होगा। इसी मॉड्यूल में तीनों अंतरिक्ष यात्री रहेंगे। सर्विस मॉड्यूल में तापमान और दबाव को बनाए रखने वाले उपकरण, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, ऑक्सीजन और खाने-पीने का सामान होगा।

स्पेस जाने वाले भारतीयों को पहले मिलेगी ट्रेनिंग

 

इस मिशन की जिम्मेदारी 56 साल की वैज्ञानिक डॉ. वीआर ललितांबिका को सौंपी गई है। यात्रियों का चयन इसरो और एयरफोर्स मिलकर करेंगे। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि यात्री किस क्षेत्र विशेष के होंगे, लेकिन, कहा जा रहा है कि पहले किसी पायलट को प्राथमिकता दी जा सकती है। चुने गए यात्रियों को करीब तीन साल की ट्रेनिंग मिलेगी, जिसमें जीरो ग्रेविटी ट्रेनिंग भी शामिल होगी। वहीं, अंतरिक्ष राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि क्रू मेंबर्स को ट्रेनिंग के लिए देश से बाहर भी भेजा जा सकता है।


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पहले होंगी टेस्ट उड़ान

 

लोगों को अंतरिक्ष में भेजने से पहले मानवरहित टेस्ट किए जाएंगे। सिवन ने बताया कि पहला मानव रहित फ्लाइट टेस्ट आज से 30 महीने और दूसरा टेस्ट 36 महीने बाद किया जएगा। उसके बाद तकरीबन 40 महीने बाद भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

 

मिशन पर होगा इतना खर्च

 

कहा जा रहा है कि इस मिशन पर कुल दस हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। यह बजट बाकी देशों द्वारा मानव मिशन पर खर्च किए गए बजट से काफी कम है। यह बजट इसरो को दिए जानेवाले सालाना 6 हजार करोड़ रुपये के बजट से अलग होगा।

पैदा होंगे रोजगार के अवसर

 

के. सिवन ने कहा है कि गगनयान मिशन के तहत अगले तीन साल में 15 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा, जिनमें से करीब 900 लोगों को सीधे इसरो में नौकरी मिलेगी।

2004 से चल रही थी इस मिशन की तैयारी

 

बता दें कि इसरो ने अंतरिक्ष में इंसानों को भेजने की प्रौद्योगिकी विकसित करने का काम 2004 में ही शुरू कर दिया था, लेकिन यह परियोजना अब तक ‘प्राथमिकता सूची’ में नहीं थी, लेकिन अब इस पर तेजी से काम किया जा रहा है।

 

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