‘संविधान काव्य’: अब दोहे में गा कर याद कर सकते हैं संविधान

author image
5:47 pm 16 Dec, 2016

Advertisement

दुनिया के तमाम संविधानों में भारत का संविधान सबसे बड़ा है। इस लंबे-चौड़े संविधान की भाषा कितनी जटिल है, इस बात का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि अधिकतर लोग संविधान में वास्तव में क्या लिखा है, उससे अनजान हैं।  आमतौर पर लोगों को अदालतों और पुलिस की कार्रवाई के वक्त ही इसकी याद आती है। वहीं, अगर मैं यह कहूँ कि भारत का संविधान दोहे के रूप में मिल जाए, जिसे आप पढ़ तो सकते ही हैं, साथ में गुनगुना कर याद भी कर सकते हैं, तो आप देश के इस महत्वपूर्ण ग्रंथ को और बारीकी से जानना चाहेंगे।

आईपीएस अधिकारी एस. के. गौतम ने लोगों को इसी मुश्किल से निजात दिलाने की ठानी। इसके परिणामस्वरूप सामने आया उनका ‘संविधान काव्य’। यह भाषा के लिहाज से दोहे के रूप में सरल तो है ही, साथ में एनिमेशन ने इसे ऐसा बना दिया है कि बच्चों की भी रूचि जागेगी।

‘संविधान काव्य’ लिखने वाले आईपीएस एस. के. गौतमbbci

भारत के संविधान को जन-जन तक बेहद सरल भाषा में पहुंचाने की कोशिश पुड्डुचेरी के पुलिस प्रमुख एस. के. गौतम ने अपने संविधान काव्य में की है। 12 अनुसूची और 448 अनुच्छेदों वाले भारतीय संविधान को उन्होंने 394 दोहों में पूरा कर दिया है। गौतम ने एक अख़बार के साक्षात्कार में बतायाः

“असल में संविधान हमारे देश की नीतियों का मार्गदर्शक है। इसलिए हमारे देश का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ भी है। लेकिन आम आदमी इसे नहीं समझ पाता, क्योंकि इसकी भाषा थोड़ी जटिल है। इसलिए मैंने यही सोचा कि संविधान को कैसे सरल भाषा में लिखा जा सकता है। मैंने यही कोशिश की और इसे पदों में रच दिया। इस तरह से यह आसान हो गया।”

एस. के. गौतम का मानना है कि अगर संविधान की समझ आसान हो जाए, तो इसका सही से उपयोग करना भी सीखा जा सकता है। ख़ासतौर से पुलिस के मामले में ये बात और ज़्यादा मायने रखती है, क्योंकि आए दिन ऐसी ख़बरें सामने आती हैं जब पुलिस खुद ही संविधान में दिए अधिकारों का दुरुपयोग करती है। गौतम संविधान के दुरुपयोग के संबंध में कहते हैंः


Advertisement

“मेरी कोशिश यही है कि संविधान सब लोगों तक पहुंचे। एक बार लोग इसे जान कर समझ लेंगे तो उपयोग भी करने लगेंगे। अपने अधिकारों के बारे में बात करने लगेंगे और फिर इसके दुरुपयोग की संभावना वैसे ही कम हो जाएगी।”

कुल 77 पन्नों की किताब में आप संविधान को जानने के साथ ही उसे याद भी कर सकते हैं। अगर भूल जाएं तो जेब से निकाल कर दोबारा पढ़ लीजिए, किताब पॉकेटबुक रूप में भी है। इस संबंध में एस. के. गौतम कहते हैंः

“जो भी अनुच्छेद हैं और उसके संशोधन हैं वो सब मिल कर काफी लंबे वाक्य बन जाते हैं, फिर उसके मूल भाव को समझाना कठिन था। यह दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है। लेकिन एक बार काम शुरू हो गया तो फिर मुझमें रुचि भी जगी और मज़ा भी आया।”

एस. के. गौतम की इस कोशिश ने संविधान को सरल, सुगम और आकर्षक बना दिया है और पढ़ते वक्त यह बोझिल नहीं करता। संविधान काव्य लोगों को भारत के संविधान के और भी करीब ले जाएगा। भला इससे अच्छा क्या हो सकता है।

ऑनलाइन पढ़े ‘संविधान काव्य’

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement