ये 10 आधुनिक रायफल्स भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल की जाती हैं

Updated on 13 Apr, 2018 at 11:16 am

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भारतीय सेना दुनिया की चौथी सबसे मज़बूत सेना है और सबसे मज़बूत सेनाओं में से एक होने की वजह से भारतीय सेना के पास हथियारों की भी अच्छी-खासी रेंज है। यदि पड़ोसी मुल्क कभी हमला करता भी है तो हमारी सेना के पास उसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हथियारों की कमी नहीं है। हथियार में बंदूकें बहुत अहम होती हैं। सेना में कई तरह की बंदूकों का इस्तेमाल होता है। कुछ तो सालों से इस्तेमाल हो रही हैं और कई युद्ध की भी गवाह बन चुकी हैं।

 

चलिए आपको बताते हैं कि भारतीय सेना कौन-कौन सी बंदूकें इस्तेमाल करती हैं।

 


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1. पिस्टल ऑटो 9एमएम 1ए

 

पिस्टल ऑटो 9एमएम भारतीय सेना की स्टैंडर्ड गन है। यह भारतीय सेना, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स और राज्य पुलिस द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। ये रिकॉइल ऑपरेटेड, सेल्फ लोडिंग और सेमी ऑटोमैटिक पिस्तौल है। इसमें 9×19 पैराबेलम गोलियों का इस्तेमाल होता है। एक बार लोड करने पर इससे 13 राउंड गोलियां चलती हैं। यह पिस्तौल पश्चिम बंगाल के इच्छापुर में स्थित राइफल फैक्ट्री में तैयार होती है।

2. इनसास असॉल्ट राइफल

 

इनसास (इंडियन न्यू स्मॉल आर्म्स सिस्टम) स्टैंडर्ड राइफल भारतीय सेना में बहुत इस्तेमाल होता है।  यह राइफल ऑर्डिनेंस फैक्ट्री तिरुचिलाप्पल्ली में बनता है। लड़ाई में इस राइफल का पहली बार इस्तेमाल कारगिल युद्ध के समय 1999 में हुआ था। उस समय इस राइफल की काफी आलोचना भी हुई। कहा गया कि यह बार-बार जाम हो जाता था और अपने आप ऑटोमैटिक मोड में चला जाता था। हालांकि, इसके नए वर्ज़न में सारी कमियों को ठीक कर लिया गया और अब यह रिटायर होने वाला है। इसकी जगह नया और आधुनिक 7.62×51एमएम नाटो कारतूस वाला राइफल सेना इस्तेमाल करेगी। इस राइफल को नेपाल, भूटान और ओमान की सेनाओं द्वारा भी इस्तेमाल किया जाता है।

3. एकेएम असॉल्ड राइफल

 

यह राइफल एके-47 का उन्नत रूप है। ये सेमी ऑटोमैटिक और फुली ऑटोमैटिक दोनों ही मोड में प्रति मिनट 600 राउंड गोलियां दाग सकता है। एके-47 सीरिज़ की बंदूकें दुनिया में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाती है। सेना के अलावा ये बंदूक पैरामिलिट्री फोर्स, गार्ड, घातक, बीएसएफ और एनएसजी भी इस्तेमाल करती है।

4. एके-103 असॉल्ट राइफल

 

ये राइफल एके-74एम का ही विकसित रूप है। एके-103 राइफल को भी पुराने राइफल की तरह किसी भी तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे ग्रेनेड लॉन्चर की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सेना के अलावा ये राइफल पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और स्पेशल फोर्स द्वारा भी इस्तेमाल होता है।

 

5. विध्वंसक एंटी-मटेरियल राइफल

 

ये देशी एंटी मटेरियल राइफल ऑर्डिनेंस फैक्ट्री तिरुचिल्लापली में बना है। इसका इस्तेमाल दुश्मनों के बंकर, बख्तरबंद गाड़ियों, रडार सिस्टम, संचार के उपकरण, रखे हुए एयरक्राफ्ट और इंधन स्टोरेज की सुविधा को नष्ट करने के लिए किया जाता है। इसकी रेंज 1800 मीटर है।

 



6. ड्रैग्नोव एसवीडी 59 स्नाइपर राइफल

 

ये स्नाइपर राइफल भारतीय सेना के प्रशिक्षित निशानेबाज़ इस्तेमाल करते हैं। सोवियत में बने इस राइफल का पहली बार उपयोग शीत युद्ध के दौरान हुआ था। इस राइफल में 7.62×54 एमएम कारतूस और अलग किए जाने वाले बॉक्स में 10 राउंड गोलियां होती हैं। इसकी रेंज 800-900 मीटर है।

 

7. आईएमआई गैलिल 7.62 स्नाइपर राइफल

 

ये राइफल इज़ारइल में बनती हैं। इसमें 7.62×51 एमएम नाटो कारतूस और अलग किए जाने वाले बॉक्स में 20 राउंड गोलियां होती हैं। ये राइफल 25 से भी ज़्यादा देशों में इस्तेमाल हो रही हैं। इसे भारतीय सेना में प्रमुखता से इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

8. माउजर एसपी66 स्नाइपर राइफल

 

जर्मनी में बना ये राइफल बोल्ड-एक्शन स्नाइपर राइफल है। यह सीविलियन मॉडल 66 सुपर मैच पर आधारित है, जो हंटिंग राइफल है। इसकी रेंज 800 मीटर है और स्पेशल फोर्स के साथ ही भारतीय सेना इसका उपयोग करती है।

 

9. एसएएफ कार्बाइन 2ए1 सब मशीनगन

 

ये मशीनगन सब मशीनगन 1ए1 का ही साइलेंस्ड वर्ज़न है। यानी इसमें साइलेंसर लगा हुआ है। ये कानपुर की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बना है और एक मिनट में 150 राउंड फायर कर सकता है। इसका इस्तेमाल खासतौर पर स्पेशल फोर्स द्वारा आतंकवादी हमलों के समय होता है।

 

10. एनएसवी हैवी मशीनगन

 

सोवियत में डिज़ाइन किया हुआ ये मशीनगन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री तिरुचिल्लापली में बना है। ये एंटी एयरक्राफ्ट गन के तौर पर इस्तेमाल होता है। ये गन हवा में 1500 मीटर और जमीन पर 2000 मीटर तक निशाना लगा सकती है।


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