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यह है भारतीय सेना का स्वदेशी मल्टी बैरल रॉकेट लांचर, जानिए इससे जुड़ी 8 महत्वपूर्ण जानकारियां

Published on 21 April, 2018 at 5:49 pm By

भारतीय सेना को दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर सेना होने का गौरव हासिल है। भारतीय सीमाओं की दुर्गम भूगौलिक स्थिति और पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद के चलते भारत जैसे तेजी से विकसित होते देश के लिए एक ताकतवर सेना बेहद आवश्यक है। इसी वजह से पिछले कुछ दशकों में भारत ने सेना के विस्तार और उन्नत हथियारों की जरूरत की तरफ काफी ध्यान दिया है।


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आज से कुछ दशकों पहले भारत उन्नत तकनीकों व हथियारों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हुआ करता था। लेकिन आज की तस्वीर थोड़ी हटकर नजर आती है। हालांकि आज भी भारत हथियारों का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से खरीद रहा है, लेकिन पहले के मुकाबले भारत में निर्मित हथियारों की संख्या में भी भारी इजाफा हुआ है। उदाहरण के तौर पर भारतीय सेना के मल्टी बैरल रॉकेट लांचर, पिनाक पर ही एक नजर डाल लेते हैं।

डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन (डीआरडीओ) के द्वारा विकसित पिनाक अपने आप में एक सम्पूर्ण एमबीआरएल सिस्टम है। जो कई किमी दूर से दुश्मन के ठिकाने ध्वस्त करने में सक्षम है।

ये हैं भारतीय सेना के इस महत्वपूर्ण हिस्से से जुड़ी 8 अहम जानकारियां।

1 . इस तरह विकसित किया गया पिनाक को।

पिनाक को डीआरडीओ की पुणे स्थित लैब, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट के नेतृत्व में विकसित किया गया था। इसे विकसित करने का पूरा काम दिसंबर 1986 में शुरू होकर दिसंबर 1992 में ख़त्म हुई थी। इसे विकसित करने के लिए भारतीय रक्षा विभाग के द्वारा करीब 26 करोड़ रुपयों का बजट पारित किया गया था।

 

2. साल 1998 में पिनाक को भारतीय सेना में शामिल किया गया।

 

3. दो वैरिएंट में मौजूद है पिनाक। 


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मौजूदा समय में पिनाक के दो वैरिएंट हैं। इन्हें पिनाक मार्क I एवं मार्क II के नाम से जाना जाता है। पिनाक मार्क I फिलहाल भारतीय सेना का हिस्सा है, जबकि पिनाक मार्क II के कई सफल परीक्षण किए जा चुके हैं।  

 

4. यह है इसकी मारकक्षमता 

पिनाक मार्क I अधिकतम 40 किमी के दायरे में दुश्मन का सफाया कर सकती है। इसका उन्नत वैरिएंट पिनाक मार्क II करीब 75 किमी की दूरी से दुश्मनों के ठिकाने पर हमला करने की ताकत रखता है।

 

5. अधिक मारकक्षमता एवं सटीकता के साथ पिनाक का तीसा वैरिएंट भी विकसित किया जा रहा है।



 

6. यह मल्टी बैरल राकेट लांचर 44 सेकंडों में 12 विध्वंसक रॉकेट दाग सकता है।

 

7. कारगिल युद्ध में हुआ था इस्तेमाल। 

 

 

भारतीय सेना के द्वारा पिनाक का इस्तेमाल साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध में किया गया था। उस समय पिनाक ने पहाड़ की चोटियों में स्थित दुश्मन के ठिकानों को सफलतापूर्वक ध्वस्त करते हुए सेना को बड़ी सफलताएं दिलाई थी।

 

8. पिनाक एमबीआरएल सिस्टम को चार अलग-अलग मोड में इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

  1. ऑटोनोमस मोड – इस मोड में पूरे राकेट लॉन्चिंग सिस्टम को फायर कंट्रोल कंप्यूटर (एफसीसी) के द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
  2. स्टैंड-अलोन मोड – इसमें सिस्टम का नियंत्रण एफसीसी ऑपरेटर के पास नहीं होता, बल्कि कंसोल में मौजूद ऑपरेटर सिस्टम को नियंत्रित करता है।
  3. रिमोट मोड – इस मोड में लांचर सिस्टम को नियन्त्रित करने के लिए एक रिमोट कंट्रोल यूनिट केबिन से 200 मी की दूरी पर स्थापित की जाती है। जिससे रॉकेट लांचर सिस्टम को नियंत्रित  किया जाता है।
  4. मैन्युअल मोड – इसमें लॉन्चिंग सिस्टम से जुड़े सभी ऑपरेशन्स बिना मशीनी सहायता के पूरे किए जाते हैं।

 

यदि दुनिया के अन्य उन्नत देशों के पास मौजूद मल्टी बैरल रॉकेट लांचर से तुलना की जाए तो पिनाक मार्क II एवं विकसित किया जा रहा इसका उन्नत वैरिएंट काफी ताकतवर और दुश्मन खेमे में हलचल मचाने में सक्षम नजर आते हैं।

 

 


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मौजूदा समय में भारतीय सेना में पिनाक के दो रेजिमेंट मौजूद हैं। भारतीय सेना के द्वारा साल 2022 तक इनकी संख्या बढ़ाकर 10 किए जाने की योजना है।

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