इन 6 मुद्दों पर बहस के लिए हमेशा तैयार रहते हैं भारतीय

Updated on 23 Mar, 2018 at 3:55 pm

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भारतीयों को बहस करना बहुत पसंद है, वो किसी भी मुद्दे पर बहस करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। विविधता वाले इस देश में किसी मुद्दे पर लोगों के बीच एक राय बनना लगभग असंभव काम है। वैसे हमारे देश के लोगों को अपना काम छोड़कर बहस करने में बड़ा आनंद आता है, मगर सिर्फ़ बहस करने में। उस बहस से कोई हल निकालने में नहीं। चलिए आपको बताते हैं भारतीयों के बहस के पसंदीदा मुद्दे।

1. राजनीति

 

 

भारत में करीब 1800 राजनीतिक पार्टियां हैं और हर एक पार्टी किसी समुदाय विशेष के विचारों का प्रतिनिधित्व करती है। भले ही कोई समुदाय छोटा हो या बड़ा, लेकन उनकी अहमियत को नकारा नहीं जा सकता। इतनी ढेर सारी पार्टियों वाले देश में हमेशा एक पार्टी को दूसरे में कोई न कोई कमी नज़र आ ही जाती है और बस फिर क्या। एक पार्टी दूसरी पार्टी के विचारों और सिद्धांतों की आलोचना शुरू कर देती है। आम लोग भी अपनी पसंदीदा पार्टी या नेता को लेकर बहस के दंगल में कूद पड़ते हैं और आधी-अधूरी जानकारी होने पर भी इस तरह किसी पार्टी के पक्ष या विपक्ष में बोलेंगे जैसी कि उसके बारे में पूरी रिसर्च कर रखी हो।

2. धर्म

 

 

राजनीति के बाद हम भारतीयों का सबसे विषय है धर्म। धर्मनिरपेक्ष देश भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। ऐसे में कई बार अपने फायदे के लिए समुदाय विशेष या राजनीतिक दल धर्म की आड़ में दंगे भड़काकर अपना हित साधने लगते हैं। धर्म का मामला कितना संवेनशील है ये आपको राम मंदिर मुद्दे से समझ आ सकता है, जिसे लेकर ज़बर्दस्त दंगा हुआ था।

3. नेहरू और गांधी

 

 


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भारत के दोनों महान नेता बरसों पहले स्वर्ग सिधार चुके हैं, लेकिन उनकी कुछ अच्छी-बुरी बात को लेकर अक्सर लोगों के बीच बहस छिड़ जाती है। नेहरू की लग्ज़ीरियस लाइफस्टाइल और अफेयर पर जहां लोगों को बहस करना पसंद है, वहीं देश के बंटवारे के लिए आज भी कई लोग गांधी को ज़िम्मेदार ठहराते हैं और एक बार अगर इन दोनों पर बस छिड़ गई तो लोग चुप होने का नाम ही नहीं लेते।

4. किक्रेट

 

 

हमारे देश में क्रिकेट सिर्फ़ एक खेल नहीं, बल्कि धर्म बन गया है। इससे लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। क्रिकेट के अलावा भारतीयों की बाकी खेलों में कोई खास दिलचस्पी नहीं है। भारतीय क्रिकेट टीम के हर खिलाड़ी का नाम उन्हें पता होगा, मगर अपने देश की फुटबॉल या हॉकी टीम के कैप्टन तक का नाम किसी को नहीं पता। क्रिकेट के प्रति लोगों में इतनी दीवानगी है कि खेल के साथ ही वो क्रिकेटर्स की पर्सनल लाइफ के बारे में भी जानना चाहते हैं। जब कभी क्रिकेट का मैच होता है तो हर जगह लोग बस इसी की चर्चा करते नज़र आएंगे।

5. कांग्रेस के शासन के 60 साल

 

 

पिछले 60 साल के शासन में कांग्रेस ने देश के लिए क्या किया? बीजेपी की सरकार बनने के बाद से लोगों के मन में अक्सर ये सवाल उठता है और ये उठना लाज़िमी भी है। तो जब भी लोगों को अपने रूटीन का में से फुर्सत मिलती है या जब भी वो ग्रुप में होते हैं तो इसी मुद्दे पर बहस शुरू हो जाती है। भारत की आज़ादी के बाद ही चीन भी आज़ाद हुआ, मगर विकास की बात करें तो आज की तारीख में चीन भारत से कही आगे है। एक समूह का कहना है कि इसके लिए कांग्रेस के 60 सालों का शासन ज़िम्मेदार है। जबकि दूसरा तबका कहता है कि ब्रिटिश हूकूमत के हाथों बर्बाद हो चुके भारत को सहेजने का मुश्किल काम कांग्रेस ने किया। खैर इस बहस का कोई अंत नहीं है।

6. राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ

 

 

आरएसएस प्रभावशाली संगठन है। हालांकि, इससे पहले कई बार इस पर प्रतिबंध भी लग चुका है। पहली बार महात्मा गांधी की हत्या के बाद, दूसरी बार आपातकाल के दौरान और तीसरी बार बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय। हिंदुत्व को बढ़ावा देने के नाम पर आरएसएस की गतिविधियों की कुछ लोग आलोचना करते हैं, तो कुछ लोग इसे सही ठहराते हैं, जब कभी भी आरएसएस का नाम लिया जाता है, तब लोगों के बीच बहस हो ही जाती है।

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