अब वियतनाम को आकाश मिसाइल बेचेगा भारत, चीन को घेरने की कवायद

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Updated on 10 Jan, 2017 at 2:49 pm

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दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अब भारत सरकार वियतनाम के साथ संबंध प्रगाढ़ करने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में भारत अब चीन को स्वदेश में निर्मित आकाश मिसाइल बेचने की तैयारी कर रहा है। दोनों देशों के बीच इस संबंध में सक्रिय बातचीत हो रही है।

गौरतलब है कि चीन लगातार भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक रवैया अख्तियार किए हुए है। चाहे परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत के दाखिले की बात हो या फिर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को प्रतिबंध से बचाने की, चीन ने लगातार विरोध की कूटनीति को अंजाम दिया है। यही नहीं, चीन इन दिनों हिन्द महासागर के क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियां बढ़ाने में लगा है। इसके प्रतिक्रिया-स्वरूप भारत का चीन के पड़ोसी मुल्कों से सैन्य संबंध बनाना लाजिमी है। पहले जापान और अब वियतनाम के साथ सैन्य व रणनीतिक साझेदारी को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

कुछ महीने पहले ही मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि भारत ने वियतनाम को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और स्वदेशी पनडुब्बी रोधी टारपीडो वरुणास्त्र भी देने की पेशकश की है। वहीं, वियतनाम ने अब आकाश मिसाइल में अपनी रुची जाहिर की है।



भारत न केवल वियतनाम को आकाश मिसाइल की तकनीक ट्रान्सफर करेगा, बल्कि एयर डिफेन्स सिस्टम का ज्वाइन्ट प्रॉडक्शन भी करेगा। बताया गया है कि ब्रह्मोस के मुकाबले आकाश मिसाइल पर कॉमन प्लान तैयार करना ज्यादा आसान है। आकाश मिसाइल का सिस्टम 96 फीसदी स्वदेशी है, जबकि ब्रह्मोस को भारत और रूस ने मिलकर तैयार किया है। ब्रह्मोस के 60 फीसदी पुर्जे रूस में बने हैं।

इससे पहले 2013 में भारत ने विशाखापत्तनम स्थित अपने नैवी सबमरीन स्कूल आईएनएस सातवाहन में वियतनामी नौसैनिकों की ट्रेनिंग शुरू की थी। अब वियतनामी पायलट्स को सुखोई जेट्स उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाएगी।


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