सामरिक रूप से बेहद अहम होगा तवांग तक रेल नेटवर्क, चीन को उसके ही हथियार से जवाब देने की तैयारी

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Updated on 1 Apr, 2017 at 5:26 pm

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हाल के दिनों में चीन ने भारत से सटे सीमा इलाकों में युद्ध स्तर पर रेल व सड़क नेटवर्क का विस्तार किया है। सीमा पर विकास कार्यों को चीन ने भारत के खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। अब भारत भी चीन को उसके ही हथियार से जवाब देने की निर्णय लिया है।

भारत अरुणाचल प्रदेश के सुदूर में स्थित तवांग तक रेल नेटवर्क के विस्तार की तैयारी कर रहा है। तवांग जिला भारत का अभिन्न हिस्सा है, और रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। हालांकि, इस पर चीन लंबे समय से अपना अधिकार जताता रहा है।


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चीन का मानना है कि तवांग तिब्बत का हिस्सा है। चीन किसी भारतीय नेता या अधिकारी के दौरों पर विरोध जताता रहा है। हाल ही में उसने दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा का भी विरोध किया है। भारत ने हर बार चीन के दावे को खारिज किया है।

भारत-चीन सीमा पर स्थित तवांग जिले तक प्रस्तावित रेल नेटवर्क की स्थापना के लिए केन्द्र सरकार ने रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा तथा केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजीजू जिम्मेदारी दी है। ये दोनों वरिष्ठ नेता इस सुदूर क्षेत्र में रेल नेटवर्क की व्यवहारिकता खंगालने का काम करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दोनों मंत्री शनिवार को अरुणाचल के दौरे पर जाएंगे। यहां भालुकपोंग असम-अरूणाचल प्रदेश सीमा पर भारतीय रेलवे का अंतिम स्टेशन है। भालुकपोंग से तवांग के बीच की दूरी 378 किलोमीटर है। असम की राजधानी गुवाहाटी से तवांग तक रास्ते से जाने में 18 घंटे लगते हैं। तवांग की जनता आपातकालीन स्थितियों में गुवाहाटी पर ही आश्रित होती है।

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