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भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सुनियोजित तरीके से ‘रेडियो युद्ध’ का खोला मोर्चा

Published on 28 September, 2016 at 1:25 pm By

उरी के सैन्य शिविर पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ शुरू हुई असैनिक जंग में ‘रेडियो मोर्चा’ खोल दिया है। आकाशवाणी यानी ऑल इंडिया रेडियो (AIR) के जरिए पाकिस्तान को आतंकवाद और बलूचिस्तान के मुद्दों पर बेनकाब करने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं।


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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उरी हमले के बाद आकाशवाणी की पाकिस्तान सेवा पर 16 बुलेटिन प्रसारित हुए हैं। इन 16 बुलेटिन का केंद्रीय विषय यही है कि धर्म और आतंक किसी भी देश की विदेश नीति का हिस्सा नहीं हो सकता। AIR के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि यह एक तरह का सुनियोजित तरीका है, जिसकी कोशिश पाकिस्तान को बेनकाब करना है।

वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ऑल इंडिया रेडियो निभा चुकी है महत्वपूर्ण भूमिका।

आपको याद दिला दें कि वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ऑल इंडिया रेडियो की भूमिका अहम रही थी। युद्ध के दौरान ऑल इंडिया रेडियो ने अपने विभिन्न कार्यक्रमों और बुलेटिन के माध्यम से पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) के अवाम की आवाज़ उठाई थी। बांग्लादेश के गठन की मांग कर रहे मुक्ति वाहिनी के समर्थन में संदेश प्रसारित कर AIR ने जनता के बीच विश्वास जगाने की सफल कोशिश की थी।

यही नहीं, युद्ध के दूसरे सप्ताह में रेडियो के माध्यम से सेना प्रमुख जनरल सैम मानेकशॉ की तरफ से एक संदेश प्रसारित किया गया था, जिसमें कहा गया कि पाकिस्तानी सेना आत्मसमर्पण कर दे। साथ में यह संदेश भी प्रसारित किया गया था कि बांग्लादेश को चारों तरफ से भारतीय सेना ने घेर रखा है। इसके बाद ऑल इंडिया रेडियो को एक प्रमुख हथियार की तरह इस्तेमाल कर पाकिस्तानी सेना को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर किया गया।

बीते दिनों प्रसारित हुए 16 बुलेटिन का केंद्रीय विषय



द इकॉनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक शॉर्ट वेव पर प्रसारित होने वाले इन समाचार बुलेटिनों में कुरान की वे आयतें भी प्रसारित की गई हैं, जो सिर्फ़ शांति की बात करती हैं। साथ में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि इस्लामिक परंपरा में कहीं भी आतंकवाद की जगह नहीं है।

एक बुलेटिन में यह भी चर्चा हुई कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने जब संयुक्त राष्ट्र में बुरहान वानी और कश्मीर का जिक्र किया तो वे एक ‘कमजोर राजनेता’ की तरह व्यवहार करते नजर आए। बुलेटिन में यह भी कहा गया कि शरीफ धर्म का गलत तरीके से इस्तेमाल करके आतंक को सही ठहरा रहे थे।

AIR के बुलेटिनों में बलूचिस्तान के मुद्दे का भी जिक्र किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वहां किस तरह से मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और लाेग किस तरह पाकिस्तान की ज्यादतियों को झेल रहे हैं। इन बुलेटिनों के जरिए बलूचिस्तान के मामले में पेश की जा रही सामग्री में लगातार बदलाव भी किया जा रहा है। जैसे कि पाकिस्तानियों को बताया जा रहा है कि बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, लेकिन इस इलाके को विकास की दौड़ में पीछे धकेला जा रहा है। यह क्षेत्र पाकिस्तान के लिए उसकी 65 फीसदी जलविद्युत आपूर्ति का जरिया है, फिर भी यहां के लोगों का वर्तमान और भविष्य अब तक अंधेरे हैं। वे अपने वाजिब हकों के लिए भी तरस रहे हैं।

इसी तरह दो बुलेटिनों में बताया गया कि ‘कुरान में बेगुनाहों की हत्या पर मनाही है। खास तौर पर उनको मारने पर, जो जवाबी लड़ाई नहीं कर सकते। आतंकवाद आखिरकार बेगुनाहों की हत्या करना ही है। लिहाजा, जो इस्लाम के नाम पर आतंक को बढ़ावा दे रहे हैं, वे गलत हैं।’ AIR के अधिकारियों के मुताबिक, इन बुलेटिनों को न सिर्फ पाकिस्तान की जनता बल्कि राजनेता और सेना के अफसर भी गौर से सुन रहे हैं।

प्रसार भारती के एक अधिकारी कहते हैं कि ‘हम चाहते हैं कि पाकिस्तान के लोगों तक वहां की सरकार और सेना की हकीकत के बारे में सीधा संदेश पहुंचे। इसके लिए हम योजनाबद्ध तरीके से अभियान चला रहे हैं। हमारी टीम दिन-रात इस काम में जुटी है।’


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