2030 तक भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा चांद, जल्द ही हनीमून मनाने जाएंगे लोग

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4:19 pm 19 Feb, 2017

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इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) के एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि वर्ष 2030 तक भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को चांद से हासिल कर सकता है। प्रोफेसर सिवाथनु पिल्लई का कहना है कि चांद की सतह पर पाए जाने वाले हीलियम-3 मैटर से यह मुमकिन हो सकेगा। उन्होंने कहा कि चांद की मिट्टी को निकालकर धरती पर लाना इसरो की प्राथमिकताओं में शामिल है। दूसरे देश भी इस परियोजना पर काम कर रहे हैं।

पिल्लई कहते हैं कि चांद की मिटट्टी में भरपूर मात्रा में हीलियम-3 मौजूद है। इससे भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा संबंधी जरूरतें पूरी हो सकती हैं। गौरततलब है कि हीलियम-3 हीलियम का आइसोटॉप है, जिसे ऊर्जा में बदला जा सकता है। प्रोफेसर पिल्लई ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के कार्यक्रम कल्पना चावला स्पेस पॉलिसी डायलॉग के दौरान अपनी बात रख रहे थे।

प्रोफेसर पिल्लई ने कहा कि अगले कुछ दशकों में चांद पर हनीमून मनाने जाने की परिकल्पना सच साबित होने वाली है।


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गौरतलब है कि यूरोपीय वैज्ञानिक अब चांद पर इन्सानों की बस्ती बसाने की तैयारी चल रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले 10 सालों में इन्सान चांद पर रहना शुरू कर देगा।

स्पेस एक्स के संस्थापक इलन मस्क ने मंगल पर साल 2024 तक एक साथ 100 लोगों को भेजने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। अगर ऐसा हो सका, तो जल्द ही और भी लोगों को चांद पर भेजा जा सकेगा।

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