भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं

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Updated on 13 Jul, 2017 at 5:19 pm

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नोएडा के सेक्टर 78 में स्थित महागुन सोसायटी के लिए बुधवार की सुबह का समय किसी आम दिन के शुरू होने की तरह नहीं था। नोएडा के आसपास झुग्गियों और बस्तियों में रहने वाले बांग्लादेशियों ने सैकड़ों की संख्या में आकर महागुन सोसायटी पर हमला कर दिया। करीब तीन घंटे तक चले उपद्रव के दौरान न केवल तोड़फोड़ की गई, बल्कि सोसायटी में रहने वाले लोगों के साथ मारपीट की गई, उनके साथ गाली-गलौच की गई। कहा जा रहा है कि यहां हमले में उपद्रवियों की जो भीड़ शामिल रही थी, उनमें अधिकतर बांग्लादेशी नागिरक हैं। ये अवैध रूप से नोएडा और आसपास के इलाकों में रह रहे हैं। इसे स्थानीय लोग बांग्लादेशी कॉलोनी के नाम से जानते हैं। मामले की शुरुआत तब हुई थी जब महागुन सोसायटी के एक फ्लैट में काम करने वाली मेड जोहरा बीवी पर गृह स्वामी ने चोरी का आरोप लगाया था। इसके विरोध में मेड ने अपने साथियों को बुला लिया और विवाद ने बड़ा रूप ले लिया।

बांग्लादेशियों को नहीं मिलेगा काम

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महागुन सोसायटी में रहने वाले लोगों ने तय किया है कि अब वे बांग्लादेशियों से काम नहीं कराएंगे। नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा रकी रेजिडेन्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन्स की सर्वोच्च संस्था NEFOMA ने इस संबंध में एक विज्ञप्ति जारी करते हुए इस पूरे मसले पर क्षोभ जताया है। साथ ही मेड रखने से पहले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के लिए कहा है। माना जा रहा है कि बिना किसी जांच के रह रहे बांग्लादेशी नागरिक सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा हैं। दिल्ली पुलिस ने भी पाया है कि दिल्ली में होने वाली लूटपाट, छिनैती और नौकरों के द्वारा लूटपाट की घटनाओं में बांगलादेशियों का बड़ा हाथ होता है।

आए हैं बांग्लादेश से लेकिन कागजात हैं भारत के

माना जाता है कि नोएडा व आसपास के इलाकों की झुग्गियों में रह रहे लोग बांग्लादेशी नागिरक हैं, जो अवैध रूप से यहां रह रहे हैं। लेकिन हैरत की बात यह है कि इन लोगों ने अपने भारतीय होने के सभी सबूत इकट्ठे कर रखे हैं। बांग्लादेशी अवैध तरीके से भारत में भारत में प्रवेश करते हैं और असली प्रमाणपत्र हासिल कर लेते हैं। इस काम उनकी मदद स्थानीय नेता करते हैं, जिन्हें इनमें वोट बैंक दिखता है। अब आलम यह है कि भारत में करोड़ों की संख्या में अवैध बांग्लादेशी हैं, जिनकी पहचान अब मुश्किल है।


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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में इस वक्त दो करोड़ से अधिक बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं। इस बात की जानकारी वर्ष 2016 के नवंबर महीने में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में दी थी।

सुप्रीम कोर्ट भी कर चुका है तल्ख टिप्पणी

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट भी तल्ख टिप्पणी कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में अपराध से संबंधित एक मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ तल्ख टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में बढ़ते अपराध पर सरकार से जानकारी मांगी थी और पूछा था कि अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने के लिए सरकार क्या प्रयास कर रही है?

फिलहाल दिल्ली, नोएडा और अासपास के इलाकों में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को ट्रैक करने की कोई व्यवस्था नहीं है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इस तरह का एक सिस्टम बनाए जाने पर जोर दिया जाना चाहिए। इनकी सही तरीके से जांच पड़ताल होनी चाहिए।

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