अंडमान में मिलिट्री बेस को आधुनिक बना रहा है भारत, चीन को मिलेगी चुनौती

Updated on 21 Oct, 2017 at 11:42 am

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भारत अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह पर स्थित अपने मिलिट्री बेस को आधुनिक बना रहा है और साथ ही इसका विस्तार भी किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मिलिट्री बेस का विस्तार एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत किया जा रहा है। यही वजह है कि केन्द्र सरकार ने रिटायर्ड नेवी चीफ एडमिरल डी के जोशी को यहां के उपराज्यपाल पद की जिम्मेदारी दी है। अंडमान एवं निकोबार द्वीप का सामरिक महत्व है। यहां पर भारतीय नौसेना की बड़ी मौजूदगी से इलाके की सुरक्षा में सहूलियत होगी।

इससे पहले अंडमान चर्चा में था कि क्योंकि यहां रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने नौसैनिकों के साथ दिवाली मनाई थी।

चीन पर नजर रखने की तैयारी

इसी साल जुलाई महीने में हिन्द महासागर में चीनी पनडुब्बी देखे जाने की खबर मिली थी। वहीं, चीन की पनडुब्बियां पाकिस्तान और श्रीलंका में तैनात होकर भारत के लिए खतरा बढ़ा रही हैं। पड़ोसी देशों द्वारा इस तरह की गतिविधियों की वजह से भारत लंबे समय से यहां अपनी सैन्य स्थिति को मजबूत करने की कोशिशों में लगा था।


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निकोबार द्वीपसमूह के कैंपबेल बे में आईएनएस बाज़ पर हवाई पट्टी 3,050 फीट से बढ़ाकर 10,000 फीट तक की जा रही है।



इससे साफ संदेश मिलता है कि यहां भारत अपनी उपस्थिति के विस्तार में कोई कोताही नहीं बरतना चाहता है। अगर सबकुछ नियत तरीके से चलता रहा तो भारत आईएनएस बाज़ पर अपने महात्वाकांक्षी P-8I खोजी एयरक्राफ्ट को वर्ष 2021 तक तैनात कर देगा।

डॉकयार्ड निर्माण के साथ ही नौसेना पोर्ट ब्लेयर के पास अपनी दूसरी फ्लोटिंग ड्राई डॉक नेवी (FDDN) को शुरू करने की भी योजना बना रही है। डॉकयार्ड निर्माण के पूरा होने के साथ ही यहां अधिक संख्या में नौसेना के जहाजों की तैनाती की जा सकेगी।

इसके अलावा तीन अन्य फॉरवार्ड ऑपरेटिंग बेस (FOBs) का निर्माण भी चल रहा है।


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