359 लोगों को आतंकियों के चंगुल से बचाने वाली नीरजा भनोट याद है?

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12:17 pm 18 Feb, 2016

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नीरजा भनोट एक ऐसा नाम, जिसने डर को भी डरने के लिए मजबूर कर दिया। उसके हौसले, जुनून के सामने एक बड़ी घटना ने भी अपने घुटने टेक दिए।

23 वर्षीया नीरजा भनोट एक जिन्दादिल लड़की थी, जिसने 359 लोगों को आतंकवादियों के चंगुल से बचाया था। उस वक़्त नीरजा पैन एम एयरलाईन में वरिष्ठ फ्लाइट अटेंडेंट के तौर पर तैनात थी।

5 सितम्बर, 1986 यही वो तारीख है, जब नीरजा निःसंकोच, निडरता से अपनी आखिरी सांस तक अपने कर्तव्य के साथ खड़ी रही। 5 सितबंर को पैन एम 73 विमान कराची, पाकिस्तान के एयरपोर्ट पर खड़ा था, जहां पाइलट का इंतजार किया जा रहा था।

तभी अचानक सुरक्षा गार्ड के वेश में 4 आतंकवादी विमान के अंदर घुस आए और विमान पर कब्जा कर लिया। उस वक़्त विमान में करीब 400 यात्री थे।

Neerja Bhanot

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विमान में पायलट न होने के कारण आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सरकार पर दबाव डाला कि वह विमान में पायलट जल्द से जल्द भेजे। लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने इससे इन्कार कर दिया।

आतंकवादियों ने तभी नीरजा और विमान में मौजूद बाकी क्रू मेंबर्स को सभी यात्रियों के पासपोर्ट लेने को कहा, ताकि वे किसी अमेरिकन को मारकर पाकिस्तानी सरकार पर दबाव डाल सकें। इस बात से सचेत होकर नीरजा ने विमान में मौजूद अमेरिकन यात्रियों के पासपोर्ट छुपाकर, बाकी सबके पासपोर्ट आंतकियों को दे दिए।

इसके बाद आंतकियों ने एक ब्रिटिश नागरिक को गनपॉइन्ट पर लिया और विमान के गेट के सामने खड़ा कर पाकिस्तानी सरकार को धमकी दी कि अगर पायलट नहीं भेजा गया तो वह उसे ज़िन्दा नहीं छोड़ेंगे, लेकिन नीरजा ने यहां अपनी समझदारी, सूझबूझ दिखाते हुए आतंकियों से बात कर, उस ब्रिटिश नागरिक को भी बचा लिया।



जैसे-जैसे वक़्त बीत रहा था, वैसे-वैसे विमान का ईंधन भी ख़त्म हो रहा था। 17 घंटे बीत चुके थे, नीरजा को अंदाजा था कि ईंधन कभी भी ख़त्म हो सकता है। योजना के अनुरूप जब चारों तरफ अंधेरा हो गया, नीरजा ने विमान के सभी आपातकालीन दरवाजे खोल दिए।

तभी सारे यात्री उन दरवाज़ों से अपनी जान बचाने के लिए कूदने लगे। वहीं दूसरी ओर आतंकियों ने भी अंधेरे में ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू कर दी। नीरजा चाहती, तो वह भी बाहर आ सकती थी, लेकिन अभी भी कई यात्री विमान में मौजूद थे। तभी पाकिस्तानी सेना के कमांडो भी विमान की घेराबंदी कर चुके थे, जिसमें कमांडो ने तीन आतंकियों को मार गिराया।

नीरजा की मौत उस समय हुई, जब वह तीन बच्चों को लेकर आपातकालीन दरवाजे की तरफ जा रही थी, तभी चौथा आतंकी नीरजा के सामने आ गया। तीनों बच्चों को बचाने के लिए नीरजा ने अपनी जान की परवाह नहीं की। उन तीनों को उस आतंकी के चंगुल से बचाया, लेकिन तब तक आतंकी ने कई गोलियों से नीरजा को छलनी कर दिया था।

नीरजा के इस अतुल्य साहस की बदौलत उन्हें भारत सरकार ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान अशोक चक्र से सम्मानित किया। तो वहीं पाकिस्तान ने भी नीरजा के साहस को सलामी देते हुए तमगा-ए-इन्सानियत से नवाज़ा।

विमान हाईजैक होने से पहले की गई नीरजा की आखिरी फ्लाइट अनाउंसमेंट वाकई ‘वॉइस ऑफ़ करेज’ है यानी कि साहस की आवाज़। फॉक्स स्टार हिंदी ने अपने यूट्यूब चैनल पर नीरजा भनोट की असली आवाज़ को साझा किया है, जिसे आप यहां सुन सकते हैं।


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