2017 में लिए गए कोर्ट के इन फैसलों से बदलेगी तस्वीर!

Updated on 29 Dec, 2017 at 12:15 pm

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साल समाप्ति पर है, लेकिन यह साल कई मायनों में याद किया जाता रहेगा। इस साल कोर्ट के फैसले भी सुर्ख़ियों में रहे, जो ऐतिहासिक साबित हो सकते हैं। ये फैसले जनता से सीधे रूप से जुड़े हुए थे। कोर्ट ने ऐसे-ऐसे फैसले दिए, जिससे न्याय पर आस्था को और बल मिला। इन फैसलों को एक बार फिर से जान लेना बेहद जरूरी है!

ये रहे कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले।

1. राइट टु प्राइवेसी

 

राइट टु प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देकर मौलिक अधिकार की रक्षा की है और यह संविधान के आर्टिकल 21 (जीने के अधिकार) के अंतर्गत आता है। कोर्ट ने 1954 में 8 जजों की संवैधानिक बेंच के एमपी शर्मा केस और 1962 में 6 जजों की बेंच के खड्ग सिंह केस में दिए फैसले को पलटकर ऐसा किया। केंद्र सरकार ने कहा था कि निजता मौलिक अधिकार नहीं है। अब कोर्ट के फैसले का सीधा असर आधार कार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं पर होगा।

2. आरूषि तलवार केस

 

नोएडा में हुई आरूषि मर्डर मिस्ट्री को पूरा देश पिछले 10 सालों से झेल रहा था। 13 साल की आरूषि अपने बेडरूम में मृत पाई गई थी और आरोप हेमराज नामक नौकर पर लगे थे। हालांकि, हेमराज भी मृत पाया गया था। हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में आरूषि के माता-पिता को जमानत देकर राहत दे दी।

3. राम रहीम को सज़ा

 

रसूखदार और एक प्रभावशाली बाबा होने के बावजूद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 2002 के एक रेप केस में सज़ा सुनाई गई। बाद में राम रहीम के समर्थकों ने दिल्ली और पंचकुला में हिंसा फैलाई, जिसमें 30 लोगों की मौत हुई तथा 250 से ज़्यादा लोग घायल हो गए।

4. निर्भया केस में सज़ा बरकरार

 


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सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस के अपराधियों की मौत की सज़ा को बरकरार रखा। 5 मई 2017 को कोर्ट ने उम्रकैद के विरुद्ध अपील को खारिज करते हुए जघन्य अपराध के लिए रहम न कर मिशाल पेश की।

5. मुंबई बम धमाका मामला

 

1993 मुंबई बम धमाकों में 6 आरोपियों को 16 जून 2017 में स्पेशल कोर्ट ने दोषी ठहराया। 67 साल के रियाज़ सिद्दीकी को आतंकवाद को बढ़ावा देने के चलते उम्रकैद की सज़ा दी। इस हमले में 257 लोगों की मौत हुई थी।

6. सिनेमाघरों में राष्ट्रगान

 

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुई कहा था कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगाने के दौरान खड़े होकर देशभक्ति दिखाना जरूरी नहीं है। यह देशभक्ति का पैमाना नहीं हो सकता है। आज के संवेदनशील समय में ऐसे निर्णय अहम हो जाते हैं।

7. ट्रिपल तलाक गैरकानूनी

 

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फ़ैसला देते हुए तलाक-तलाक-तलाक को असंवैधानिक करार दे दिया था। कोर्ट के अनुसार मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने का यह रिवाज खराब तरीका है।

8. रियल इस्टेट पर नकेल

 

रियल इस्टेट के महारथी यूनिटेक, जेपी और सुपरटेक ने तय समय में फ़्लैट उपलब्ध कराने में नाकामयाब होने पर फाइन लगाया गया। ग्राहकों के हक़ में ये कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला था।

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