ये हैं 13 प्रभावशाली तस्वीरें जिन्होंने दुनिया में तहलका मचा दिया

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Updated on 9 Dec, 2016 at 6:17 pm

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तस्वीरें भले ही क्षण विशेष का दर्शन होती हैं, लेकिन एक-एक तस्वीर में पूरी कहानी का मर्म छुपा होता है। तस्वीरों के मामले में दुनिया बहुत आगे बढ़ गई है। पहले एक तस्वीर के लिए जहां कई दिनों तक इन्तजार करना पड़ता था, वहीं आज की तारीख में दुनिया में प्रतिदिन करोड़ों तस्वीरें खींची जाती हैं। कुछ ही सेकेन्ड्स में तस्वीरें खींचकर इसे आम से लेकर खास लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। सोशल मीडिया पर शेयर पर इन तस्वीरों को वायरल किया जा सकता है। प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने अब तक के 100 प्रभावशाली तस्वीरों की एक सूची तैयार की है, जिन्होंने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा। इसके लिए मैगजीन ने क्युरेटर्स, इतिहासकार और फोटो संपादकों की एक टीम बनाई थी। हमने इन 100 तस्वीरों में से 13 तस्वीरों को चुना है, जिन्होंने दुनिया में एक समय तहलका मचाया था। इतना तय है कि इन तस्वीरों को अगर आप एक बार देखेंगे तो यह लंबे समय तक आपके दिमाग में बनी रहेंगीं।

1. वियतनाम युद्ध

यह तस्वीर युद्ध की विभीषिका का तथ्यपरक दर्शन है। ‘नापाम गर्ल’ नामक शीर्षक वाली इस तस्वीर को पत्रकारिता के क्षेत्र में सम्मानित पुलित्जर पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। वियतनाम युद्ध के दौरान 8 जून 1972 को इस तस्वीर को खींचा था फोटोग्राफर निक उट ने। नापाम शहर में ली गई इस तस्वीर में हमलों के बाद भागते बदहवास बच्चे दिखाई पड़ रहे हैं। फोटो में सामने दिख रही 9 साल की बच्ची किम फुक (जिसके शरीर पर कपड़े नहीं हैं) एक आइकॉनिक प्रतिलिपी बन गई। इस तस्वीर को इतिहास बदलने वाली फोटो करार दिया गया था।

2. बौद्ध भिक्षु का आत्मदाह

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वियतनाम युद्ध के दौरान एक बौद्ध भिक्षु के आत्मदाह की तस्वीर को अपने कैमरे में कैद किया था एपी के फोटोग्राफर मैल्कोल्म ब्राउन ने। ब्राउन एक प्रोफेशनल फोटोग्राफर नहीं थे, इसके बावजूद इस तस्वीर की विषय-वस्तु ने दुनिया में तहलका मचा दिया। बौद्ध भिक्षु थिक क्वांग डुक ने सरकार की नीतियों के खिलाफ 11 जून 1963 को वियतनाम की राजधानी सायगॉन में आत्मदाह कर लिया था। दरअसल, थिक क्वांग डुक बहुसंख्यक बौद्धों के खिलाफ सरकार के भेदभावपूर्ण रवैए के प्रति दुनिया का ध्यान खींचना चाहते थे। सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा था। यह असंतोष उस वक्त चरम पर पहुंचा जब मई 1963 में सरकार द्वारा गौतम बुद्ध के जन्मदिवस के अवसर पर बौद्ध ध्वज फ़हराने पर रोक लगा दी गई। इससे कुछ ही दिन पहले सरकार ने ह्यू के आर्कबिशप द्वारा आयोजित एक समारोह में ईसाईयों को वेटिकन की पताका फ़हराने की अनुमति दी थी। इसका विरोध करते हुए थिक क्वांग डुक अपने 350 बौद्ध भिक्षु साथियों के साथ सायगॉन शहर के एक व्यस्त चौराहे पर पहुंचे और आत्मदाह कर लिया। वियतनाम के इतिहास में यह तस्वीर मील का पत्थर साबित हुई।

3. भूख से मरता बच्चा और गिद्ध

यह तस्वीर सूडान में वर्ष 1993 में आए अकाल और भूखमरी की भयावहता का प्रतीक है। इस फोटो में आप देख सकते हैं कि एक अत्यन्त कमजोर बच्चा राहत शिविर तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है और एक गिद्ध इस बच्चे के प्राण निकलने का इन्तजार कर रहा है। इस तस्वीर को खींचने वाले फोटोग्राफर केविन कार्टर ने कुछ समय बाद आत्महत्या कर ली थी। इस तस्वीर को पुलित्जर पुरस्कार मिला था। हालांकि, इस तस्वीर के लिए केविन की तीव्र भर्त्सना भी हुई, जिन्होंने उस बच्चे को गिद्ध से बचाने की कोई कोशिश नहीं की। कार्टर ने अपने आत्महत्या विषयक नोट में इसका जिक्र किया था।

4. टैंक मैन

टैंक मैन एक अज्ञात व्यक्ति को दिया गया उपनाम है। यह व्यक्ति तियानानमेन चौक पर 5 जून 1989 को टैंकों की एक कतार के सामने खड़ा हो गया था। इससे ठीक एक दिन चीनी सेना ने इसी चौक पर विरोध प्रदर्शन को बलपूर्वक दबा दिया था। इस घटना में सैकड़ों लोग मारे गए थे और हजारों घायल हुए थे। यह तस्वीर मनुष्य के अदम्य साहस की कहानी का बखान करता है। इस तस्वीर को बीजिंग के एक होटेल की छठी मंजिल पर स्थित बाल्कनी से खींचा था फोटोग्राफर जेफ वाइडनर ने। इस तस्वीर ने दुनिया में तहलका मचा दिया था।

5. द फॉलिंग मैन

वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर 11 सितम्बर, 2001 में हुए आतंकी हमले के तुरंत बाद यह तस्वीर सामने आई थी। यह संभवतः इकलौती ऐसी तस्वीर है, जिसमें इस हमले में किसी मरते हुए व्यक्ति को दर्शाया गया है। हमले के अगले ही दिन यह तस्वीर दुनिया के लगभग सभी अखबारों में प्रकाशित की गई थी। इस तस्वीर में बचने की की आस में वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर से गिरता व्यक्ति दिख रहा है। इस व्यक्ति की पहचान जाहिर नहीं हो सकी थी, लेकिन माना जाता है कि वह वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर का ही एक कर्मचारी था, जो घटना के वक्त उत्तरी टावर पर मौजूद था। इस तस्वीर को देखकर ऐसा लगता है कि वह बड़े आराम से संतुलन बनाए हुए है। वह एक तीर की तरह जमीन की ओर आ रहा था। इस तस्वीर को खींचा था एपी के फोटोग्राफर रिचर्ड ड्रिय ने।

6. एलन कुर्दी

तीन साल के इस बच्चे की तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया था। एन कुर्दी नामक यह सीरियाई बच्चा अपने परिवार के साथ गृहयुद्ध से बचने के लिए एक नौका में तुर्की से ग्रीस जाने की कोशिश कर रहा था। इस नौका के डूब जाने पर कुर्दी की मौत हो गई। 2 सितम्बर 2015 को इस तस्वीर को तुर्की के समुद्री किनारे पर क्लिक किया था निलोफर दमीर ने। बेहद मार्मिक इस तस्वीर के सामने आने के बाद इराक और सीरिया के शरणार्थियों को यूरोप में आने की लगभग छूट मिल गई थी। लेकिन ऐसे लोगों की भी कमी नहीं थी, जो यह बता रहे थे कि इस तस्वीर को हथियार बनाकर यूरोप के खुले संस्कृति को निशाना बनाया जा रहा है।

7. नागासाकी परमाणु गुबार

हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए जाने के ठीक तीन दिन बाद नागासाकी पर परमाणु बम गिराया गया। अमेरिकी बमबर्षक बी-29 से इस बम के नीचे गिरने के बाद धुएं का एक बड़ा गुबार आग के जबर्दस्त गोले ऊपर की तरफ तेजी से बढ़े। लेफ्टिनेन्ट चार्ल्स लेवी ने इस तरह की 16 तस्वीरें ली थीं, जो अपने आप में एक इतिहास को समेटे हुए हैं। इन दोनों शहरों पर हुई बमबारी से द्वितीय विश्व युद्ध का पूरा नक्शा पलट गया और जापान को बिना शर्त हथियार डालना पड़ा था। इन शहरों का सैन्य महत्व नहीं था। इन शहरों में न तो हथियार बनाने वाले कारखाने मौजूद थे और न ही वहां कोई सैन्य जमावड़ा मौजूद था। दरअसल, अमेरिका दुनिया को यह दिखाना चाहता था कि आने वाले दिनों में दुनिया के भाग्य का फैसला वह करेगा। अमेरिकी परमाणु हमले की विभीषिका आज भी रोंगटे खड़ी करती है।

8. चांद पर पहला कदम

47 साल पहले यानी 20 जुलाई, 1969 को अमेरिकी एस्ट्रोनॉट नील आर्मस्ट्रॉन्ग चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले इंसान बन गए। वह नासा के अपोलो-11 मिशन का नेतृत्व कर रहे थे। उनके साथ ही चांद पर कदम रखने वे व्यक्ति बने बज़ एल्ड्रिन वे अपोलो 11 के ल्यूनर मोड्यूल पायलट थे। यह अन्तरिक्ष यात्रा के इतिहास का पहला यान था, जिसने मानव के साथ चांद पर कदम रखा था। यह तस्वीर एल्ड्रिन के द्वारा क्लिक की गई थी, जो अब एक इतिहास बन गई है।

9. चे ग्वेरा

चे ग्वेरा की इस तस्वीर का शुमार दुनिया के प्रभावशाली तस्वीरों में है। चे न सिर्फ एक क्रान्तिकारी, बल्कि चिकित्सक, लेखक, गुरिल्ला नेता, सामरिक सिद्धान्तकार और कूटनीतिज्ञ भी थे। उन्होंने दक्षिण अमेरिका के कई राष्ट्रों में क्रान्ति लाकर उन्हें स्वतंत्र बनाने का प्रसाय किया। वर्ष 1960 में पत्रकार अल्बर्टो कोर्डा द्वारा क्लिक की गई चे का यह फोटो पूरे विश्व में सांस्कृतिक विरोध तथा वामपंथी गतिविधियों का प्रतीक बन गया। यह अलग बात है कि इस तस्वीर को किसी अखबार ने अपने पन्नों पर जगह नहीं दी थी, इसके बावजूद इसे विश्व की सबसे प्रसिद्ध तस्वीरों में से एक माना गया है।

10. गांधीजी और उनका चरखा

टाइम पत्रिका ने 100 सबसे प्रभावशाली तस्वीरों के अपने संकलन में चरखा के साथ महात्मा गांधी की वर्ष 1946 की एक तस्वीर को शामिल किया है। इस तस्वीर को क्लिक किया था फोटोग्राफर मार्गरेट बौर्के-व्हाइट ने। तस्वीर में गांधी जमीन पर पतले गद्दे पर बैठकर खबर पढ़ते हुये नजर आ रहे हैं, जबकि उनके आगे उनका चरखा रखा है। इसके करीब 2 साल बाद उनकी हत्या कर दी गई। भारत में चरखे का इतिहास बहुत प्राचीन होते हुए भी इसमें उल्लेखनीय सुधार का काम महात्मा गांधी के जीवनकाल में ही हुआ। गांधीजी और चरखा एक-दूसरे के पूरक थे।

11. मोहम्मद अली

मोहम्मद अली की यह तस्वीर 25 मई 1965 को तब क्लिक की गई थी, जब उन्होंने 34 वर्षीय सोनी लिस्टन को रिंग में धाराशायी कर दिया था। उस समय अली की उम्र महज 23 साल थी और बॉक्सिंग की दुनिया पर छा जाने के लिए तैयार थे। इस फोटो को क्लिक करने वाले फोटोग्राफर थे लिफर। अली ने सोनी को पहले राउन्ड में महज एक मिनट और 44 सेकेन्ड्स में धूल चाटने पर मजबूर कर दिया। कालांतर में यह तस्वीर किंवदंती हो गई, ठीक मोहम्मद अली की जिन्दगी की तरह।

12. द सिचुएशन रूम

ओसामा बिन लादेन को पकड़ने के लिए चलाए गए ऑपरेशन के बाद इस तस्वीर को अमेरिकी सरकार ने जारी किया था। 1 मई 2011 को व्हाइट हाउस के आधिकारिक फोटोग्राफर्स द्वारा क्लिक की गई इस तस्वीर में उस सिचुएशन रूम को दर्शाया गया है जहां से सरकार पाकिस्तान में ओसामा के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन की पल-पल जानकारी ले रही थी। इस अभियान में अमेरिकी जवानों ने लादेन को मार गिराया और उसके शव को समुन्दर में दफना दिया। इस हाई-प्रोफाइल अभियान का नेतृत्व खुद राष्ट्रपति बराक ओबामा कर रहे थे।

13. ईरान फायरिंग स्क्वायड

इस तस्वीर ने जहांगीर रजमी को प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार दिलाया था। यह तस्वीर क्लिक की गई थी 27 अगस्त 1979 को लेकिन वर्ष 2006 तक इसके फोटोग्राफर की पहचान जारी नहीं की गई थी। इस तस्वीर में कथित तौर पर खुमैनी विरोधी लोगों को फायरिंग स्क्वायड के द्वारा मौत के घाट उतारते दिखाया गया है। इसे पहली बार ईरान के ही एक अखबार ने प्रकाशित किया था, लेकिन फोटोग्राफर की पहचान उजागर नहीं की गई थी। बाद में इसे दुनिया के लगभग सभी अखबारों में जगह दी गई।


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