बंगाल में अवैध मदरसों से जुड़े हैं आतंक के तार

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Updated on 12 Jan, 2016 at 8:42 pm

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मालदा में साम्प्रदायिक हिंसा के बाद प्रशासनिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि पश्चिम बंगाल में हाल के दिनों में आतंकवादी घटनाओं के तार अवैध मदरसों से जुड़े हो सकते हैं। ये मदरसे अक्टूबर 2014 में बर्धमान में हुए ब्लास्ट की घटना के बाद से ही सुरक्षा एजेन्सियों की नजर में हैं, लेकिन इन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

बर्धमान, मालदा, मुर्शीदाबाद, नदिया सहित कई इलाकों में हाल के दिनों में सैकड़ों ऐसे अवैध मदरसे खडे़े कर दिए गए हैं, जहां जिहाद की शिक्षा दी जाती है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मदरसे जिला प्रशासन की नाक के नीचे अपनी गतिविधियां चलाते हैं, लेकिन सरकार या कोई भी सरकारी अधिकारी इन पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता।

कालियाचक, गोपालगंज, सुजापुर, साहबाजपुर, मोज्जमपुर और वेलियाडांगा जैसे कई ऐसे मुस्लिम बहुल इलाके हैं, जहां मदरसे कुटीर उद्योग की तरह चल रहे हैं। आरोप है कि इन मदरसों में जिहाद की शिक्षा दी जाती है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मालदा जिले में 32 मान्यताप्राप्त मदरसे हैं। जबकि अवैध मदरसों की संख्या 200 से अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश से लगे सीमावर्ती जिलों में अवैध तरीके से सरकारी जमीन खरीदी जाती है और वहां मदरसे या इसी तरह के इस्लामिक संस्थान ख़़ड़े कर दिए जाते हैं। इनमें से अधिकतर मदरसा संचालकों पर आरोप है कि वे मुस्लिम छात्रों में राष्ट्र के प्रति द्वेष फैलाते हैं।


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मालदा जिले के भाजपा नेता विश्वप्रिय रायचौधरी कहते हैंः “इन मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों का आसानी से ब्रेन वाश किया जाता है और वे जिहादी बन जाते हैं।”

मालदा के जिलाधीश शरद द्विवेदी को संभवतः जमीनी हकीकत का अंदाजा नहीं है। यही वजह है कि मालदा जिले में वैध या अवैध मदरसों की संख्या पूछे जाने पर वह कहते हैंः

मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है। आपको राज्य शिक्षा विभाग बेहतर बता सकता है। इस बारे में मुझे भी उनसे ही पता चलेगा।

वर्ष 2014 में हुए कई बम धमाकों की घटनाओं के बाद बंगाल के मदरसों पर सुरक्षा एजेन्सियां नजर गड़ाए हुए हैं। इन एजेन्सियों का मानना है कि राज्य में अवैध मदरसों का उपयोग छात्रों को जिहादी बनाने के लिए किया जाता है।

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