पुराने ज़माने में इन 8 तरह की बॉडी को माना जाता था आदर्श फिगर

Updated on 20 Feb, 2018 at 11:42 am

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आज के ज़माने में जिसे देखो वही स्लिम होने की कोशिश में लगा हुआ है। खासतौर पर महिलाएं और लड़कियां तो ज़ीरो फिगर की चाह में कुछ भी करने को तैयार रहती हैं, बिना ये सोचे-समझे कि ये उनकी सेहत के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। दरअसल, आज के दौर में स्लिम होना ही परफेक्ट फिगर कहलाता है, मगर पहले ऐसा नहीं था। पुराने ज़माने में लंबी से लेकर कर्वी महिलाएं तक परफेक्ट फिगर वाली कहलाती थीं। तब ज़ीरो फिगर का क्रेज़ नहीं था। चलिए आपको बताते हैं पुराने ज़माने में महिलाओं की कैसी बॉडी मानी जाती थी परफेक्ट फिगर।

1. ज़्यादा वज़न

 

आज के ज़माने में तो ऐसी बॉडी वाली महिलाओं को मोटी कहा जाता है, मगर 14वीं से 16वी सदी तक मोटी और ज़्यादा वज़न वाली महिलाओं को आकर्षक माना जाता था। उस समय पतली होना गरीबी की प्रतीक था। यानी जिसे खाना नहीं मिलता वही दुबली-पतली होती हैं। यदि आप उस दौर की पेटिंग्स देखेंगे तो पता चलेगा कि मोटी महिलाओं को ही आदर्श फिगर वाली माना जाता था।

2. छोटी कमर

 

विक्टोरियन काल में महिलाओं का पूरा फोकस सिर्फ कमर पर ही होता था। कमर छोटी दिखे इसके लिए वो कॉरसेट पहनती थीं। इस वजह से कई बार उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत होती थी। कई महिलाएं पतली कमर पाने के चक्कर में अपनी सेहत से भी समझौता करने को तैयार रहती थीं। छोटी कमर पाने के चक्कर में कई की पसलियां भी टूट जाती थीं।

3. एंड्रोगिनस लुक

 

1920 के दौरान महिलाएं आज की तरह अपनी कर्वी बॉडी शो ऑफ नहीं करती थीं, बल्कि वो पूरे बदन को ढंककर रखती थीं। उनके ब्रेस्ट उभरे हुए न दिखे इसके लिए वो लेयर वाले कपड़े पहनती थीं, कई महिलाएं ब्रेस्ट के पास कपड़ा बांध लेती थी, जिससे उनका शरीर सपाट दिखे। इस दौरान महिलाओं को लड़कों वाला लुक ही ज़्यादा लोकप्रिय था।

4. हॉलीवुड का प्रभाव

 


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1930 से 1950 के बीच अधिकांश महिलाएं हॉलीवुड फिल्मों की हीरोइन से प्रभावित थीं। वो मर्लिन मुनरों की तरह ही अपन कर्वी बॉडी दिखाना चाहती थीं। इस वजह से उन्होंने अपने शरीर पर ज़्यादा ध्यान देना शुरू किया और एक्सरसाइज़ के ज़रिए परफेक्ट बॉडी बनानी शुरू की।

5. खतरनाक रूप से दुबली

 

1960 के दौरान महिलाओं में मॉडस जैसा फिगर पाने की चाह बढ़ी और इस चक्कर में उन्होंने खतरनाक रूप से अपना वज़न घटाना शुरू कर दिया। अब वो कर्वी बॉडी नहीं, बल्कि दुबला-पतला शरीर चाहती थीं।

6. एरोबिक बॉडी

 

डायटिंग और ईटिंग डिसऑर्डर 1960 से ही शुरू हो गया और करीब दो दशक तक चला। इसके बाद 1980 में एरोबिक बॉडी का चलन बढ़ा। अब महिलाएं टाइट कपड़े पहनकर एक्सरसाइज़ के ज़रिए टोन्ड लुक पाना चाहती थीं। इस दौरान दिखावे पर ज़्याद ज़ोर दिया जाने लगा। तंग कपड़ों में बंधा कसा हुआ शरीर उस दौरान सेक्सी माना जाता था।

7. दुबले शरीर का फिर से चलन

 

एक बार फिर 1990 में दुबले होने का चलन बढ़ गया। महिलाओं के साथ ही पुरुषों में भी ये चाह बढ़ने लगी। दुबले होने के चक्कर में भूखे रहने के अलावा वो ड्रग्स का भी इस्तेमाल करने लगीं।

8. एक बार फिर से कर्वी बॉडी की चाह

 

करीब एक दशक तक दुबले-पतले शरीर की चाह के बाद अब महिलाएं फिर से कर्वी बॉडी पाना जाती हैं। हालांकि, आज भी लड़कियों में स्लिम फिगर की चाह है, मगर इसके बावजूद कई मैगज़ीन के कवर और टीवी पर मोटी महिलाओं और लड़कियों को जगह दी जा रही है और सिर्फ़ पतले होने को सुंदरता से जोड़ने वाली विचारधारा भी बदल रही है। कई कैंपेन के ज़रिए खासतौर पर लड़कियों को अपने शरीर से प्यार करना सिखाया जा रहा है, चाहे उनका शेप कैसा भी हो।

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