IAS डॉ. अहमद इकबाल उत्तराखंड के चम्पावत में मरीजों का कर रहे नि:शुल्क इलाज

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Updated on 26 Sep, 2017 at 6:55 pm

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उत्तराखंड में चंपावत जिले के जिला मजिस्ट्रेट अहमद इकबाल जब 2010 में सिविल सेवा में शामिल हुए थे, तब उनका उद्देश्य कुछ ऐसा करने का था, जिसमें वह राष्ट्र की सेवा करने के साथ ही देशवासियों की भी सेवा कर सकें। इस युवा अधिकारी ने 2009 में कर्नाटक के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मैंगलोर से एमबीबीएस की डिग्री ली थी। इसके एक साल बाद यानी कि 2010 में आईएएस में उनका सिलेक्शन हो गया।

अहमद इकबाल को लोगों की नि:स्वार्थ सेवा करने के लिए सात साल का लम्बा इंतजार करना पड़ा, क्योंकि उनके पास कोई औपचारिक पंजीकरण नहीं था।

लेकिन अब 15 सितम्बर को उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण की मंजूरी मिलने के बाद उन्होंने खाली समय में मरीजों को देखना शुरू कर दिया है।

इकबाल अपनी मूल जिम्मेदारी से वक्त निकाल कर जिला अस्पताल में मरीजों की नि:शुल्क सेवा कर रहे हैं। इकबाल जिला अस्पताल में प्रतिदिन सुबह एक घंटे यहां बतौर डॉक्टर अपनी सेवाएं देंगे।

डीएम डॉ. इकबाल का कहना है कि उन्होंने अपने ज्ञान के सदुपयोग का एक प्रयास किया है। डॉक्टरों की कमी को देखते हुए उन्होंने मरीजों का इलाज करने का फैसला किया।

दरअसल, मैदान और पहाड़ को मिलाकर बने चंपावत जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था लंबे समय से डॉक्टरों और मेडिकल उपकरणों के अभाव की समस्या से जूझ रही है। इसके चलते स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है। 22 स्वास्थ्य केंद्रों में 95 डॉक्टरों के सापेक्ष महज 42 पर ही तैनाती है।


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वहीं, पूरे उत्तराखंड में लगभग 60 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी है।  जहां जरूरत 2,700 डॉक्टरों की है वहां केवल 1000 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं।

ऐसे में कुमाऊं कमिश्नर चन्द्र शेखर ने अहमद इकबाल के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यदि उनके जैसे आईएएस अपनी विशेष योग्यता को आम जनता के सत्कार के लिए उपयोग में लाते हैं, तो इससे राज्य लाभांवित होगा।

अलबत्ता अहमद इकबाल के इस कदम से स्वास्थ्य विभाग का मनोबल भी बढ़ा है। अब जरूरत है तो चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक करने की।

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