केरल बाढ़ में इस IAS अधिकारी ने अपनी सूझबूझ से बचाई 2 लाख लोगों की जान

Updated on 3 Sep, 2018 at 6:03 pm

Advertisement

केरल बाढ़ की वजह से पूरे राज्य में त्रासदी देखने को मिल रही है। बाढ़ की वजह से जन-धन को बड़ा नुकसान पहुंचा है। हालांकि, अब धीरे-धीरे स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है। केरल की इस आपदा में देश-विदेश में रहने वाले भारतीयों ने सहयोग का हाथ बढ़ाया, तो वहीं प्रशासन ने भी कहीं कसर नहीं छोड़ी है। राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक ने पूरी मुश्तैदी से लोगों को मदद पहुंचाया है।

 

हालांकि, केरल बाढ़ की वजह से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई शीघ्र संभव नहीं है।

 

 

ऐसे विपरीत समय में एक आईएएस अधिकारी ने जो कदम उठाए वे बेहद सराहनीय हैं!

 

 

अलप्पुझा ज़िले के सब-कलेक्टर कृष्णा तेजा की सूझ-बूझ से 2 लाख लोगों के प्राणों की रक्षा हुई। जब बाढ़ की आहट ही थी, तभी इन्होंने ‘ऑपरेशन कुट्टानाड’ शुरू कर दी। दरअसल, 16 अगस्त की रात केरल के वित्तमंत्री डॉक्टर थॉमस और कृष्णा तेजा बैठक के दौरान स्थिति पर बातचीत कर रहे थे। तभी उन्हें ज्ञात हुआ कि चेंगन्नूर और कुट्टानाड में सभी बांध भर गए हैं और बारिश जारी है। शीघ्र ही बांधों को खोला जा सकता है।

 

 


Advertisement

कृष्णा तेजा ने फाटक खुलने से पहले ही लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और लगभग 2 लाख लोगों की जान बच गई। फाटक खुलने के बाद भी इन्होंने लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का काम जारी रखा। इसके लिए उन्होंने खुद के जान की भी परवाह नहीं की। इन्होंने न केवल बाढ़ से लोगों को बचाया, बल्कि उनके खाने-पीने व रहने का ही उचित प्रबंध किया।

 

 

कृष्णा तेजा बताते हैं:”हमने इस ऑपरेशन के वक्त मीडिया को दूर रखा। मीडिया में खबर जाने से अफरा-तफरी का माहौल बन सकता था। इस काम के लिए हमने 220 लोगों की सात टीम बनाई जिसने अलग-अलग जगहों पर लोगों की जान बचाई और राहत के इंतजाम किए। इस कार्य में एनडीआरएफ़ ने भी हमारी भरपूर मदद की।”

 

 

इस प्राकृतिक आपदा की घड़ी में ऐसे काबिल आधिकारियों के कुशल प्रबंधन से मदद मिली, तो वहीं भारतीय सेना के जवानों, सरकारी और निजी संस्थाओं और मछुआरों ने भी लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह घटना इस बात को साबित करती है कि एकजुटता और सूझबूझ से हम किसी भी परिस्थिति से उबर सकते हैं।

 

 

केरल बाढ़ की विभीषिका से उबरने में केरल के जनसामान्य को थोड़ा वक्त लग सकता है। लेकिन आपसी समन्वय से पूरी तरह उबरने में केरल के लोग कामयाब होंगे!

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement