चपरासी मां की रिटायरमेंट पर पहुंचे IAS, डॉक्टर और इंजीनियर बेटे; मां को दिया अपनी सफलता का श्रेय

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Updated on 2 Nov, 2016 at 5:37 pm

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किसी भी माता-पिता के लिए इससे ज्यादा गर्व की बात क्या हो सकती है कि उनकी संतान पढ़-लिखकर नाम रौशन करे। जो सपना उन्होंने अपने बच्चों के लिए देखा, वे उनके बच्चे पूरा करके दिखाएं। झारखंड के रामगढ में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड रजरप्पा क्षेत्र के टाउनशिप में चपरासी के तौर पर काम करने वाली सुमित्रा देवी रिटायर हुई हैं। उनकी यह रिटायरमेंट कई मायनों में खास रही।

यह कम ही देखा जाता है कि किसी चपरासी के विदाई समारोह में सभी लोग उपस्थित हों, लेकिन सुमित्रा आम होकर भी खास हैं।

उनके सम्मान में टाउनशिप के कर्मियों ने उनके लिए विदाई समारोह का आयोजन किया। इस विदाई समारोह में उनके तीनों बेटे भी शामिल रहे।

sumitra devi

अपने बेटों और सहकर्मियों के साथ सुमित्रा देवी financialexpress

सुमित्रा देवी के बड़े बेटे वीरेंद्र कुमार रेलवे में इंजीनियर, धीरेंद्र कुमार डॉक्टर, और सबसे छोटे बेटे महेंद्र कुमार सीवान के जिलाधिकारी पद पर नियुक्त है। यह सुमित्रा देवी के कड़े परिश्रम का ही फल है कि आज उनके बेटे इस मुकाम पर हैं।


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सभी बेटे आज सम्मानीय पद पर हैं, लेकिन उनकी मां सुमित्रा ने अपनी नौकरी नहीं छोड़ी। उनके लिए इस नौकरी के मायने कहीं अधिक हैं, क्योंकि इसकी बदौलत ही उनका घर चला। यही वजह है कि वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने में सफल रहीं।

अपनी मां पर गर्व करते हुए उनके बेटे कहते हैंः

“मां ने काफी संघर्ष कर हमें उच्च शिक्षा दिलाई। उन्हीं की बदौलत आज हम इस मुकाम पर पहुंचे हैं। कोई काम छोटा नहीं होता। मां ही हमारी प्रेरणा हैं।”

समारोह के मुख्य अतिथि और रजरप्पा क्षेत्र के महाप्रबंधक धीरेंद्र बिहारी ने कहा कि यह गौरव की बात है कि सुमित्रा देवी अपने कठोर परिश्रम से तीनों बेटों को बेहतर भविष्य दिलाने में सफल हुईं।


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