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सिर्फ 25 मिनट में मुम्बई से पुणे से पहुंचाएगी हाइपरलूप ट्रेन, जानिए इसकी खास बातें

Published on 8 December, 2016 at 11:41 am By

जल्द ही मुंबईवासी सिर्फ 25 मिनट की यात्रा कर पुणे पहुंच सकेंगे। साथ ही ट्रैफिक जाम या फिर वाहनों से होने वाला वायु प्रदूषण पुरानी बातें हो जाएंगी। यह दावा किया है बी. गैब्रियल ग्रेस्टा ने। वह दुनिया की सबसे तेज ट्रेन बनाने का दावा करने वाली कंपनी हाइपरलूप ट्रान्सपोर्टेशन टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। ग्रेस्टा भारत में यातायात की इस नई व्यवस्था को शुरू करना चाहते हैं।

अब आप निश्चित रूप से जानना चाहेंगे कि आखिर यह हाइपरलूप ट्रेन है क्या?


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दरअसल, हाइपरलूप ट्रेन बुलेट ट्रेन की दोगुनी रफ्तार से दौड़ती है। इसे बनाने वाली कंपनी का दावा है कि वैक्यूम (बिना हवा) ट्यूब सिस्टम से गुजरने वाली कैप्सूल जैसी हाइपरलूप सुपरसोनिक रफ्तार से दौड़ेगी। जी हां, इसकी रफ्तार 750 मील (1224 किलोमीटर) प्रति घंटा होगी।

हाल ही में इस ट्रेन का परीक्षण अमेरिकी शहर लास वेगास में हुआ है।

भारत जैसे देश में इस तरह की उच्च तकनीक पर बात करना बेमानी साबित हो सकता है। हालांकि, बी. गैब्रियल ग्रेस्टा मानते हैं कि हाइपरलूप भारत में यातायात की व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन ला सकता है। वह अपनी योजना को लेकर भारत के परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी से भी मिले हैं। उन्होंने मुम्बई से पुणे के बीच इसे चलाने का प्रस्ताव दिया है। फिलहाल इन दोनों शहरों के बीच सड़क मार्ग से यात्रा करने पर 3 घंटे का समय लगता है। लेकिन हाइपरलूप के माध्यम से यह दूरी सिर्फ 25 मिनट में तय की जा सकती है।



यह पूछे जाने पर कि इस परियोजना के लिए उन्होंने आखिरकार भारत को ही क्यों चुना, का जवाब देते हुए ग्रेस्टा कहते हैं कि भारत में आबादी का घनत्व अधिक है। यहां भले ही आधारभूत संरचना का अभाव है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति प्रबल है। ग्रेस्टा कहते हैं कि यह बेहद सुरक्षित है। अगर अचानक बिजली से संपर्क टूटता है, तो भी कोई दुर्घटना नहीं होगी। हाइपरलूप के पॉड धीरे-धीरे गति कम होने के साथ ही सतह को छुएंगे और यात्रियों या सामान को कोई क्षति नहीं होगी। इस पर खराब मौसम या भूकंप का भी इस पर असर नहीं होगा।

अपनी इस परियोजना के लिए कंपनी खुद निवेश करना चाहती है। इसमें सरकार को खर्च नहीं करना पड़ेगा। उन्हें जमीन और जरूरी अनुमति मिल जाए तो वह प्राइवेट इन्वेस्टर्स की मदद से काम शुरू कर सकते हैं। इस कंपनी ने नासा और बोइंग के पूर्व वैज्ञानिकों का सहयोग लिया है।

हाइपरलूप ट्रेन हाईस्पीड मैग्लेव ट्रेन जैसी तकनीक पर काम करती है। मैग्नेटिक लेवीटेशन की तकनीक इसके पॉड को हवा में ऊपर उठाते हुए बेहद तेज रफ्तार प्रदान करेगी। बुलेट ट्रेन में प्रयुक्त कॉपर की जगह इसमें ट्रैक के दोनों ओर एल्युमिनियम क्वॉयल होगी। 28 से 40 यात्रियों के साथ प्रत्येक 30 सेकेन्ड में एक पॉड अपने गंतव्य के लिए रवाना होगी। इसका मतलब यह है कि एक ट्यूब में एक दिन में 67 हजार यात्री सफर कर सकते हैं।


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आपके मन में इस परियोजना की वैधता पर भले ही सवाल उठ रहे हों, लेकिन हाइपरलूप ट्रान्सपोर्टेशन टेक्नोलॉजी के ग्रेस्टा का कहना है कि 38 महीने की समय सीमा में इसे शुरू किया जा सकता है।

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