इन 5 तरीकों से अपने मन से निकालें हार का डर

Updated on 21 Feb, 2018 at 4:54 pm

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डर एक ऐसी चीज़ जो हमें आगे बढ़ने से रोकता है, खासतौर पर जब भी हम कोई नया काम शुरू करते हैं तो आगे न जाने क्या होगा का डर हमेशा मन में बन रहता है। यही डर हमें आगे नहीं बढ़ने देता। मैं असफल हो गया तो क्या होगा। यह सोचकर हम अगर कोई काम करेंगे ही नहीं, तो जीवन में आगे कैसे बढ़ेंगे। इसलिए बहुत ज़रूरी है कि सबसे पहले अपने डर पर जीत हासिल की जाए। चलिए हम बताते हैं कैसे आप अपने डर से उबर सकते हैं।

1. आत्मविश्वास बढ़ाएं

आत्मविश्वास कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो रातो रात बढ़ जाएगी। इसके लिए आपको खुद पर विश्वास करना होगा. अपने सोचने का तरीका बदलना होगा। इसके लिए सबसे पहले तो इस बात को स्वीकार करें कि हर इंसान गलतियां करता है और उसी गलती से वो सीखता भी है। उसके बाद अपने मज़बूत पहलुओं और आपने जो भी उपलब्धि हासिल की है, उसकी एक सूची बनाएं। ये काम एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन करें। इससे आपको अपनी क्षमताओं का एहसास होगा और आपको पता चलेगा कि आप कौन सा काम कर सकते हैं। जैसे-जैसे आपकी सूची बढ़ती जाएगी आपका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और आप कोई भी काम करन से डरेंगे नहीं।

2. असफलता अंत नहीं है

जब आपको खुद पर विश्वास हो जाएगा कि आप किसी काम में सफलता पा सकते हैं, तो इस बात को आसानी से स्वीकार करेंगे कि हर काम में असफलता तो आती ही है, मगर अपने प्रयासों से असफलता को अगली बार सफलता में बदला जा सकता है। असफलता किसी चीज़ का अंत नहीं है, बल्कि ये काम को और बेहतर तरीके से करने का संकेत देती है। याद रखिए बिना प्रयास के कुछ हासिल नहीं होता।

3. लक्ष्य तय करें


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अपने डर पर जीत हासिल करने के लिए आपको अपना लक्ष्य तय करना होगा। एक बार लक्ष्य निर्धारित करने के बाद उसे पाने की योजना बनाएं, क्योंकि बिना योजना के सिर्फ़ लक्ष्य तय करने से वो हासिल नहीं होगा। बड़ा लक्ष्य तय करने के लिए आपको अपनी सोच का दायरा बढ़ाना होगा और लक्ष्य को हासिल करने के लिए आपको तेज़ी से पूरी तरह केंद्रित होकर प्रयास करना होगा। आपका लक्ष्य आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा और इस दौरान यदि असफलता मिलती है तो आप उससे कुछ सीखते हुए आगे प्रयास जारी रखते हैं। जब आप कोई बड़ा लक्ष्य तय करें तो इसके लिए पहले छोटे-छोटे पड़ाव बनाए, जब एक पड़ाव हासिल हो जाए तो आगे बढ़ें। इससे आपको हार के डर के बिना आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रहेगी।

4. जिस स्थिति पर नियंत्रण न हो उसके बारे में न सोचें

कई बार ऐसा होता है कि जब आप अपने लक्ष्य को पाने के लिए आगे बढ़ते है तो आपको असफलता का सामना करना पड़ता है और उस वक़्त ऐसा महसूस होता है कि जैसे सारी दुनिया आपके खिलाफ हो गई है। कई बार ऐसे हालात होते हैं जिन पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, ऐसे में उसके बारे में सोचकर अपना दिमाग खराब करने से अच्छा है कि उन चीज़ों पर फोकस किया जाए जो आपके नियंत्रण में है। आपके नियंत्रण में हैं आपकी भावनाएं, तो किसी बात पर किस तरह प्रतिक्रिया देनी है ये आप खुद तय करें न कि दूसरों के हिसाब से अपनी प्रतिक्रिया दें। इसलिए जब बाहर वाले आपके बारे में कुछ नकारात्मक बोलें तो उस पर ध्यान न दें और उसे छोड़कर बस अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें।

5. हार का डर एक भ्रम है

जब आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा, आप लक्ष्य तय कर लेंगे और उसे पाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे तो इस दौरान आपको एहसास हो जाएगा कि हार ज़िंदगी का एक हिस्सा है और ये हार या असफलता हमें बहुत कुछ सिखाती है। एक बार जब आप ऐसा सोचने लगेंगे तो समझ जाइए कि आपने अपने डर पर जीत हासिल कर ली है और अब आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।

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