इस हाउसिंग सोसायटी ने साल भर में 6 टन से अधिक कचरे को जैविक खाद में बदला

Updated on 12 May, 2017 at 1:00 pm

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यदि आपको लगता हैं कि मौजूदा दुनिया में बदलाव संभव नहीं है तो आपको मुम्बई आना चाहिए। मुम्बई के उपनगर मलाड के एक हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले लोगों ने पर्यावरण को संरक्षित करने की जिम्मेदारी उठाई है।

पिछले एक वर्ष से ‘मैराथन ओनेक्स’ के निवासी न केवल कचरे को कार्बनिक खाद में बदल रहे हैं, अपितु इसके आलावा अनुपयुक्त सामग्रियों का उपयोग भी कर रहे हैं। इस हाउसिंग सोसायटी ने साल भर में 6 टन से अधिक कचरे को जैविक खाद में बदल दिया है। साथ ही एक टन से अधिक अनुपयोगी सामान को रिसायकल किया गया है।

इस रिपोर्ट में हाउसिंग सोसायटी में रहने वाली राखी मेहता के हवाले से बताया गया हैः


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“हम करीब 25-30 किलोग्राम अनुपयोगी सामाग्रियों को प्रतिदिन कम्पोस्ट डिब्बों में डालते हैं। एक बड़ा सा डिब्बा इस कम्पोस्टिंग प्रक्रिया हेतु रखा गया है, जिससे 400 किलो कम्पोस्ट खाद बन जाता है।

इस डिब्बो को बायो-डिब्बा कहा जाता है। इसे केरल के कोच्ची से आयात किया गया हैं। ये वाटरप्रूफ प्लास्टिक से बने हुए हैं। इससे पुर्नचक्रण में बहुत आसानी होती है।

शुरू के दिनों में इस अभियान से जुड़े लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था, क्योंकि उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही थी। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इस प्रक्रिया को समझने के लिए मैराथन ओनेक्स के निवासियों की टीम कोच्ची गई।

इस ऐसोसियशन ने शुरू में 2 डिब्बों को लगाया, जिससे कम्पोस्ट खाद बनने में 25 दिन लग जाते हैं। इसके बाद पुनः इसे बदल दिया जाता है।

मैराथन ओनेक्स के निवासी अब जल संरक्षण की दिशा में भी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होने एक ऐसे टंकी का निर्माण किया जससे बरसात के पानी संरक्षित हो सके तथा उसका प्रयोग बोरबेल के माध्यम से किया जा सके।

इस हाउसिंग सोसायटी के निवासी अब अपनी सौर-ऊर्जा प्रणाली विकसित करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे हरित पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

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