अस्पताल ने कहा 24 घंटे में मर जाएगा मरीज़, फिर लगा ऐसा झटका दोबारा ऐसा बोलने से पहले सौ बार सोचेंगे

Updated on 13 Oct, 2018 at 4:16 pm

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बीमारी होने पर इंसान ठीक होने की उम्मीद में अस्पताल जाता है, लेकिन आजकल के अस्पतालों का जो रवैया है उससे तो अच्छा खासा आदमी समय से पहले ही मर जाए टेंशन के मारे। यदि कोई आपसे कह दे आपको भयंकर बीमारी है भले ही वो न हो, लेकिन बीमारी का नाम सुनने के बाद टेंशन से ही आपकी आधी जान सूख जाती है। ऐसा बहुत से लोगों के साथ होता है, मगर लापरवाही करने वाले अस्पतालों का कुछ नहीं बिगड़ता। लेकिन मुंबई में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां अस्पताल को मरीज़ को गलत जानकारी देने के लिए 60 हजार रुपए का ज़ुर्माना लगा है।

 

 

हमारे देश में स्वास्थ्य सेवाएं बहुत महंगी है और जितनी महंगी है डॉक्टर और जांच केंद्र उतने ही लापरवाह। मुंबई में अस्पताल और स्कैनिंग सेंटर की एक लापरवाही उन्हें ही अब भारी पड़ गई।


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मुंबई के 72 वर्षीय बुजुर्ग बच्चू राव को मामूली अल्सर था, लेकन जब उन्होंने जांच करवाई तो उन्हें कहा गया कि उन्हें धमनियों की कोई भयंकर बीमारी है जिसकी वजह से वो सिर्फ 24 घंटे ही जिंदा रह पाएंगे। स्कैनिंग सेंटर की रिपोर्ट बिलकुल गलत थी, लेकिन ऐसा कहने से पूरा परिवार टेंशन में आ गया।

 

 

2016 में हुई इस घटना के बाद बच्चू राव ने इस मामले को कंज्यूमर फोरम में उठाया और अस्पताल के साथ स्कैनिंग सेंटर पर केस कर दिया। इस मामले में कंज्यूमर फोरम ने अस्पताल की लापरवाही मानते हुए परिवार को 60,000 रुपए लौटाने का आदेश दिया। इसमें 51,000 रूपये अस्पताल और स्कैनिंग सेंटर की फीस है और उस पर 9 प्रतिशत की दर से ब्याज लगाया गया है। इस मामले की सुनवाई 2 साल चली जिस बीच बच्चू राव की मौत हो गई जिसके बाद उनके बेटे शेशगिरि ने केस लड़ा।

ये मामला उन सभी अस्पतालों और जांच केंद्रों के लिए एक सबक है जिन्हें मरीज से ज़्यादा पैसों की पड़ी रहती है और उनकी लापरवाही की वजह से मरीज़ मुश्किल में फंस जाते हैं।

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