इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे भारत से आयात करने की योजना बना रहा है हांगकांग

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Updated on 27 Apr, 2016 at 9:16 pm

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दुनिया की 8वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हांगकांग भारत से इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे आयात करने की योजना बना रहा है। यही नहीं, यह देश अपने यहां की स्थानीय कंपनियों को भारत में निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहा है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के साथ व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए हांगकांग दोहरे कराधान नीति (डबल टैक्सेशन एग्रीमेन्ट) पर जोर दे रहा है।

हांगकांग ट्रेड डेवलपमेन्ट काउन्सिल के उपनिदेशक रेमन्ड यिप ने यहां भारतीय पत्रकारों से बातचीत में कहाः

“मैं कन्ज्युमर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद के पुर्जों के भारत से आयात के मामले में भारी संभावना देख रहा हूं। हांगकांग टेलीफोन और मोबाइल फोन के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है। हमें अपने उत्पादों के लिए कल-पुर्जों की जरूरत होगी। फिलहाल हांगकांग की क्षमता $1.4 बिलियन प्रतिदिन खरीदारी की है।”

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रेमन्ड यिप ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि हांगकांग की सरकार स्थानीय कंपनियों को भारत में निर्माण ईकाई स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि यहां कल-पुर्जे बनाए जा सकें, उत्पाद असेम्बल किए जा सकें और यहां के बड़े बाजारों में खपाए जा सकें।

रेमन्ड ने बताया कि हांगकांग इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का आयात चीन, अमेरिका, जापान, कोरिया, ताईवान और मलेशिया आदि देशों से करता है और अब भारत का नंबर है। रेमन्ड का कहना था कि भारतीय उत्पाद भरोसेमंद होते हैं, क्योंकि यहां अंतर्राष्ट्रीय टेलिकॉम कंपनियां हैं, जो रिसर्च और डेवलपमेन्ट में अग्रणी हैं।

पिछले साल हांगकांग का कुल निर्यात $462 बिलियन था, जबकि आयात $518 बिलियन रहा।

भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘मेक इन इन्डिया’ कैम्पेन के बारे में रेमन्ड का कहना था कि इस तरह की कोई भी योजना व्यावसायिक दृष्टिकोण से बेहतर होती हैं। हांगकांग इस योजना का हिस्सा बनना चाहता है।

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