बेहद दिलचस्प है सेक्स टॉयज़ का इतिहास, पुराने ज़माने में भी लोग करते थे इसका इस्तेमाल

1:03 pm 12 Apr, 2018

अगर आप यह सोचते हैं कि आधुनिक युग में ही लोग सेक्स टॉयज़ का इस्तेमाल करते हैं और यह तकनीक की देन है, तो आप गलत हैं। सेक्स टॉयज़ का इतिहास मानव इतिहास जितना ही पुराना है। आपको जानकर हैरानी होगी कि प्राचीनकाल में भी लोगों के पास आनंद प्राप्ति के लिए सेक्स टॉयज़ होते थे, लेकिन बदलते वक़्त के साथ ये बदलता चला गया।

पाषाण युग

जर्मनी की एक गहरी और अंधेरी गुफा में पुरातत्वविदों को 28 हजार साल पुरानी एक चीज़ मिली है, जो डिल्डो (नकली पेनिस) की तरह दिखता है। करीब 20 सेंटिमीटर की इस चीज़ का आकार पेनिस जैसा ही है। इसे देखकर अंदाज़ा लगाया गया कि यह उस ज़माने का सेक्स टॉय रहा होगा। शायद यह दुनिया का पहला सेक्स टॉय था।

 

 

प्राचीन यूनानी सभ्यता

प्राचीन यूनान सिर्फ़ लोकतंत्र और ज्यामिती के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि उस दौर में यहां यौनक्रिया भी बेहद आधुनिक थी। रोज़मर्रा की चीजों के साथ शराब के मटके की फोटो दर्शाती है कि यूनानी छठी शताब्दी ईसा पूर्व से ही डिल्डो का इस्तेमाल करते थे। डिल्डो का ज़िक्र कई हास्य कहानियों में भी है, जो 411 ईसा पूर्व लिखी गई थी।

औद्योगिक युग

विक्टोरियन लोगों ने इंजिन की शक्ति उपयोग सीख लिया तो उसका इस्तेमाल हर जगह करने लगे। एक अमेरिकन डॉक्टर जॉर्ज टेलर ने भाप से चलने वाले डिल्डो का पेटेंट करवाया। हालांकि, इसका इस्तेमाल डॉक्टर हिस्टीरिया जैसी बीमारी का शिकार होने वाली महिलाओं के इलाज के लिए करते थे।

उस दौरान कई तरह के अन्य इलेक्ट्रोमेकैनिकल वाइबरेटर डिल्डो का भी विकास हो चुका था, लेकिन 20वीं शताब्दी के आते-आते ये सारी चीजें डॉक्टरी पेशे की बजाय लोगों के घरों में जगह बनाने लगी।

 

 

हान राजवंश में हांकी पांकी

चीन के हान राजवंश के अमीर लोग भी सेक्स टॉय का इस्तेमाल करते थे। उस दौर में कांसे के बने डिल्डो और जेड बट प्लग्स का इस्तेमाल होता था। कांसे का बना डिल्डो तो कुछ-कुछ आज के दौर के सेक्स टॉयज़ जैसा ही था, लेकिन जेड बट प्लग्स बेहद अजीब सेक्स टॉय था।

जापानी इरोटिका

शुंगा सेक्स के प्रति जूनुनी जापानियों के वुडब्लॉक प्रिंट की एक शैली थी, जो 17वीं सदी से 20वीं सदी तक लोकप्रिय रहा। प्रिंट की इस शैली को विकसित किया होकुसाई ने। उनके चित्र में कामुक क्रियाएं होती थीं। एरी की सीरिज़ मॉडल्स ऑफ कैलिग्राफी में दो नग्न महिलाएं डिल्डो के काले हिस्से पर तरल पदार्थ लगाते हुए दिखती हैं।

 

 

तो यह साप है कि सेक्स टॉयज़ आधुनिक युग नहीं, बल्कि प्राचीन काल की ही देन है, सिर्फ वक्त के साथ उसका स्वरूप बदलता गया है।

फोटो साभारः iflscience

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