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रहस्यमय कोहिनूर हीरे से जुड़े 11 ऐतिहासिक तथ्य जिनके बारे में शायद आपको नहीं पता होगा

Published on 10 February, 2016 at 9:48 pm By



भारत-ब्रिटेन संबंधों की चर्चा में ‘कोहिनूर’ हीरे का जिक्र न आए, शायद ऐसा संभव नहीं है। विद्वतजन अक्सर इंग्लैन्ड से कोहिनूर की वापसी का मुद्दा उठाते रहे हैं। वैभव के प्रतीक इस सर्वश्रेष्ठ हीरे से जुडी कहानियों में एक कहानी इसके अभिशप्त होने की भी है, जिसके अनुसार जिस किसी पुरुष ने इस हीरे को अपने पास रखा, उसका किसी न किसी प्रकार से सर्वनाश हो गया। आज हम आपको बता रहे हैं कोहिनूर हीरे से जुड़े 11 ऐतिहासिक तथ्य जो इसे खासा रहस्यमयी साबित करते हैं।

1. कोहिनूर का अर्थ होता है रोशनी का पहाड़, लेकिन इस हीरे की चमक से कई सल्तनत के राजाओं के सिंहासन का सूर्यास्त हो गया। ऐसी मान्यता है कि यह हीरा अभिशप्त है और इस तरह की मान्यता 13वीं सदी से प्रचलित है।

2. आंध्रप्रदेश के गोलकुंडा से मिला यह हीरा 5000 साल से भी अधिक पुराना है। पहले इसका नाम स्यमन्तक मणि हुआ करता था। माना जाता है कि खदान से निकला हीरा 793 कैरेट का था। साल 1852 से पहले तक इसका वजन 186 कैरेट था। पर जब यह ब्रिटेन पहुंचा तो ‘क्वीन’ को यह पसंद नहीं आया, इसलिए इसकी दोबारा कटिंग करवाई गई, जिसके बाद यह 108.9 कैरेट का रह गया।

3. बाबरनामा में कोहिनूर का प्रथम लिखित वर्णन मिलता है। परन्तु इस हीरे की कीर्ति पताका उस समय फ़ैली 1306 में, जब इसको पहनने वाले एक शख्स ने लिखा कि जो भी इंसान इस हीरे को धारण करेगा, वह पहले तो इस संसार पर राज करेगा, लेकिन बाद में उसका अधोमुखी पतन भी हो जाएगा।

4. यद्यपि इसे वहम कह कर खारिज कर दिया गया, पर कोहिनूर के इतिहासदर्शन से यह बात काफी हद तक प्रमाणिक मालूम पड़ती है। कई साम्राज्यों ने इस हीरे को अपने पास रखा, लेकिन के कभी भी खुशहाल नहीं रह सके और अंततः उजड़ गए।

5. 14वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में कोहिनूर काकतीय वंश के पास आया और इसी के साथ 1083 ई. से शासन कर रहे काकतीय वंश के “अच्छे दिन” समाप्त हो गए और 1323 में तुगलक शाह प्रथम से लड़ाई में हार के साथ ही काकतीय वंश का नाश हो गया।

6. काकतीय साम्राज्य के पतन के पश्चात यह हीरा 1325 से 1351 ई. तक मोहम्मद बिन तुगलक के पास रहा, फिर खिलजी, सैयद लोदी और 16वीं शताब्दी के मध्य तक यह मुगल सल्तनत के पास रहा और सभी का अंत इतना बुरा हुआ, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। तुगलक तो बेचारा आज भी ‘सनकी’ टाइटल झेल रहा है। उसकी बेवकूफाना नीतियों के लिए कहीं कोहिनूर तो जिम्मेदार नहीं था! बहरहाल इस दौरान वही ‘बादशाह’ खुशहाल रहा जो कोहिनूर के संपर्क में न के बराबर रहा।

7. बाद में कोहिनूर हीरे को मुग़ल बादशाह शाहजहां ने अपने मयूर सिंहासन में जड़वाया, जिसके बाद उसका आलीशान शासन तख्तापलट के साथ औरंगजेब के हाथ चला गया। उनकी पसन्दीदा पत्नी मुमताज का इंतकाल हो गया और उसके अपने बेटे ने उसे अपने ही महल में नजरबंद कर दिया।

8. वर्ष 1739 में ईरानी लुटेरा नादिर शाह भारत आया और उसने मुगल सल्तनत पर आक्रमण कर दिया। इस तरह मुगल सल्तनत का पतन हो गया और नादिर शाह अपने साथ तख्ते ताउस और कोहिनूर हीरा को ईरान ले गया। वहां उसके द्वारा ही इस हीरे का नामकरण ‘कोहिनूर’ किया गया। 1747 ई. में नादिरशाह की हत्या हो गई और कोहिनूर अफ़गानिस्तान के शासक अहमद शाह दुर्रानी के पास पहुंच गया।

9. मोहममद शाह ने शाह शुजा दुर्रानी को युद्ध में हराकर राज पद से हटा दिया। साल 1813 ई. में अफ़गानिस्तान के अपदस्थ शहंशाह शाह शूजा कोहिनूर हीरे के साथ भाग कर लाहौर पहुंचा। उसने कोहिनूर को पंजाब के राजा रणजीत सिंह को दिया एवं इसके एवज में राजा रणजीत सिंह ने शाह शूजा को अफ़गानिस्तान का राज सिंहासन वापस दिलवाया। इस प्रकार कोहिनूर वापस भारत लौट आया।

10. इस घटना के थोड़े ही दिन बाद महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु हो गई। अंग्रेजों ने सिख साम्राज्य को अपने अधीन कर लिया। इसी के साथ यह हीरा ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा हो गया। अब तक यह धारणा पक्की हो चुकी थी कि कोहिनूर पुरुष शासकों के लिए ‘अभिशप्त’ है। कोहिनूर हीरे को ब्रिटेन ले जाकर महारानी विक्टोरिया को सौप दिया गया तथा उसके शापित होने की बतायी गयी।

पर यहां एक बात ख़ास थी कि यह पुरुषों के लिए बेहद दुर्भाग्यशाली रहा था, जबकि महिलाओं पर इसके असर को अब तक परखा नहीं गया था। इसे ध्यान में रखते हुए ब्रिटिश महारानी ने हीरे को ताज में जड़वा कर 1852 में स्वयं पहना और एक प्रोटोकॉल बनाया, जिसके अनुसार भविष्य में इस ताज को सदैव महिला ही पहनेगी। और यदि कोई पुरुष ब्रिटेन का राजा बनता है, तो यह ताज उसके बजाय उसकी पत्नी पहनेगी।

11. कुछ इतिहासकार महारानी के इस ‘विश्वास’ से इत्तेफाक रखते हैं। उनके अनुसार अंततः ब्रिटेन जिसके साम्राज्य में कभी सूरज नहीं डूबता था, के अंत के लिए भी यही कोहिनूर ज़िम्मेदार बना। इतिहास गवाह है कि आधे विश्व पर राज करने वाला ब्रिटेन अंततः एक छोटा सा राज्य बन कर रह गया।

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