बरसों से जल रही है शांति का प्रतीक हीरोशिमा शांति स्मारक की ज्योति

Updated on 14 Aug, 2017 at 6:38 pm

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अगस्त 1945 में ही अमेरिका ने हीरोशिमा पर पर परमाणु बम गिराकर इस शहर का वर्तमान और इतिहास बुरी तरह बदल डाला। अमेरिका की इस एक गलती ने इस शहर को इतना लहुलुहान किया है कि बरसों बाद भी उसके ज़ख्म भरे नहीं हैं।

अमेरिका ने जापनी शहर होरोशिमा पर दुनिया का पहल परमाणु बम गिराया, जिसमें तुरंत 80,000 लोगों की मौत हो गई। इतना ही नहीं, बम से निकलने वाले रेडिएशन का असर सालों साल रहा, जिससे मृत्यु का आंकड़ा साल दर साल बढ़ता रहा।

दुनिया के इतिहास के सबसे भयावह इस हादसे की श्रद्धाजंलि स्वरूप दुनिया भर में कई स्मारक बनाए गए। इन्हीं स्मारकों में से एक है हीरोशिमा पीस फ्लेम यानी हीरोशिमा शांति स्मारक, इसे पीस फ्लेम भी कहा जाता है।


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यह स्मारक हीरोशिमा पीस पार्क में स्थित है और ये परमाणु बम हमले में मारे गए निर्दोष लोगों को समर्पित है।

इस स्मारक की ज्योति 1 अगस्त 1964 से लगातार जल रही है। दरअसल, ये ज्योति इस बात का प्रतीक है कि दुनिया से जब तक सारे विशाकारी परमाणु हथियार खत्म नहीं हो जाते, तब तक ये ज्योति यूं ही जलती रहेगी।

इस स्मारक को डिज़ाइन किया था टोकियो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केनज़ो टैंग ने। केनज़ों दुनिया के बेहतीन आर्किटेक्ट में से एक थे। इस स्मारक को इस उद्देशय से बनाया गया था कि पूरी दुनिया से परमाणु हथियार खत्म हो जाए और चारों तरफ शांति हो। साथ ही परमाणु हमले में मारे गए लोगों की आत्मा को शांति मिले।

क्योंकि इस स्मारक की ज्योति शांति का प्रतीक है, इसलिए इसे कई मौक़ों पर जलाया जाता रहा है। वर्ष 1994 में हीरोशिमा में हुए एशियन गेम्स के समय भी इस ज्योति को जलाया गया था।

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