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हिन्दू धर्म के इन 9 तथ्यों को जानकर चकरा जाएंगे आप भी

Updated on 10 September, 2018 at 12:39 am By

धर्मनिरपेक्ष भारत में धर्म के नाम पर क्या-क्या नहीं होता! मंदिर-मस्जिद के मसले तो जीवित ज्वालामुखी की तरह बन गए हैं। जब-तब इनको लेकर राजनीति गरम हो जाती है। भावनाओं के आहत होने और असहिष्णुता के इस दौर में आइए आपको बताते हैं हिन्दू धर्म के बारे में कुछ ऐसे तथ्य जो या तो गलत हैं या गलत तरीके से प्रस्तुत किए जाते हैं। ये हैं वो 9 तथ्यों जो जान लेना जरूरी है।

1. ईश्वर का अम्बार है

 


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बताया जाता है कि हिन्दू धर्म में 33 करोड़ भगवान हैं। साथ ही यह भी माना जाता है कि परमात्मा एक है। परमात्मा को पाने के मार्ग अलग-अलग हैं और इसी धर्म में दूसरी तरफ ब्रह्मा, विष्णु, महेश का कांसेप्ट भी है। दरअसल, हिन्दू धर्म अलग-अलग मान्यताओं व पंथों को प्रश्रय देता है। किसी की श्रद्धा और मान्यता का खंडन किए बिना एक ईश्वर परमात्मा को पूजने की परंपरा रही है।

2. हिन्दू मनुष्य की पूजा करते हैं

 

कोई भी हिन्दू मनुष्य की पूजा नहीं करता, बल्कि मूर्ति पूजन से अपनी प्रार्थना के लिए ध्यान को केन्द्रित करता है। यह भी कहा जाता है कि परमात्मा निरंकार स्वरूप है।

3. हिन्दू गोपूजन करते हैं

 

हिन्दू गाय के प्रति असीम आस्था रखते हैं। दरअसल, गाय शांत स्वभाव का होता है साथ ही उसके दूध और दूध से बने उत्पाद सहित गोबर, गौमूत्र औषधियों में प्रयुक्त होते हैं। चूंकि यह जीवन रक्षक का काम करती है इसलिए इसे माता भी कहते हैं और इसकी पूजा करते हैं।

4. हिन्दू शाकाहारी होते हैं

 


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हिन्दू अमूमन मांसाहारी होते हैं। मात्र 30 फीसदी हिन्दू ही शाकाहारी हैं। जो अहिंसा में विश्वास करते हैं और प्रकृति को मानते हैं, वे मांस खाने से परहेज करते हैं। हालांकि, शाकाहार को हिन्दू धर्म में उत्तम माना जाता है और शाकाहारी लोगों की अलग तरह का सम्मान दिया जाता है।

5. हिन्दू धर्म में जात-पात बहुत है

 



हिन्दू धर्म में कहीं भी ऐसा उल्लिखित नहीं है कि जाति के नाम पर विभेद हो। बल्कि कर्म प्रधानता को विशेष महत्व दिया जाता है। धर्म को सीधे कर्म से जोड़कर देखा जाता था। पहले कर्म के आधार पर वर्ण-व्यवस्था कायम था, जिससे सामजिक समरसता कायम रहती थी। अब लोग अपने सुविधा से जात-पात को लेकर आ गए।

6. महिलाओं का महत्व कम होता है

 

ऐसा बिल्कुल नहीं है। हिन्दू धर्म में महिलाओं को शक्ति स्वरूपा, जननी माना जाता है। उनकी पूजा होती है। महिलाओं के मान-सम्मान का विशेष प्रावधान है। ये बस संकरी मानसिकता के कारण होता है, धर्म के कारण नहीं। लोग अपने लाभ के लिए इसे भी धर्म से ही जोड़ देते हैं।

7. लाल सिंदूर लगाना शादीशुदा होने का प्रतीक है

 

ऐसा लोक व्यवहार की वजह से किया जाता है। धर्म से ज्यादा यह फैशन का मामला है। वैसे भी बिंदी और सिंदूर अब धार्मिक कम, फैशन के कारण महिलाएं धारण करती हैं।

8. भगवद् गीता, बाइबिल की तरह ही है

 

हिन्दू धर्म में साहित्य पर्याप्त उपलब्ध है, लिहाजा किसी भी एक किताब को धार्मिक किताब नहीं बताया जा सकता है। इस धर्म में एक से बढ़कर एक धार्मिक किताब हैं, जिनमें गीता से लेकर रामायण और वेद, उपनिषद् आदि शामिल हैं। इसलिए गीता से बाइबिल की तुलना का आधार ही नहीं है।

9. कर्म प्रधान धर्म है

 


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हिन्दू धर्म में कर्म प्रधानता है। कर्म ही मनुष्य के भविष्य और भाग्य का निर्माण करता है, यह स्पष्ट कहा गया है। कर्म ही अच्छे भाग्य को लेकर आता है।

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