3 तलाक है असंवैधानिक, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान से ऊपर नहींः हाईकोर्ट

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Updated on 8 Dec, 2016 at 2:12 pm

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार देते हुए इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन बताया है। साथ ही कहा है कि कोई पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर नहीं है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी दो मुस्लिम महिलाओं की तरफ से तीन तलाक के मुद्दे पर दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान दी।

वहीं, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए एक याचिका दाखिल करने का मन बनाया है।

गौरतलब है कि इन दिनों देश में तीन तलाक का मुद्दा काफी गरम रहा है। देश के अलग-अलग अदालतों में तीन तलाक से संबंधित मामले चल रहे हैं। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय में भी तीन तलाक को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई चल रही है। तीन तलाक की वजह से मुस्लिम महिलाओं को होने वाली समस्याओं का हवाला देते हुए कई स्वयंसेवी संस्था भी इसे प्रतिबंधित करने की मांग कर रहे हैं। केन्द्र सरकार पर इस अमानवीय प्रथा को खत्म करने के पक्ष में है।

इस संबंध में पिछले 7 अक्टूबर को सरकार द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया था कि संविधान में तीन तलाक की कोई जगह नहीं है। सरकार का यह भी कहना है कि बहुविवाह इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। साथ ही मर्दों की एक से अधिक शादी की संविधान इजाजत नहीं देता।



इस मुद्दे पर भले ही सरकार ने अपना रुख जाहिर किया है, लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड झुकने को तैयार नहीं है।

भारत के लॉ कमीशन ने पिछले दिनों अलग-अलग धर्मों में जारी कुरीतियों को खत्म करने के मकसद से 16 सवालों के जरिए आम नागरिकों से राय मांगी थी। इमें तीन तलाक, बहुविवाह और दूसरी प्रथाओं को लेकर सवाल किए गए थे, जिनका जवाब जनता को देना था। इस बात को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सरकार से नाराज है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि इस देश में कई धर्मों और संस्कृतियों के लोग रहते हैं और सभी को सम्मान दिया जाना चाहिए।


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