“18 वर्ष की उम्र के बाद आपसी सहमति से बनाया गया संबंध रेप नहीं”

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5:27 pm 11 Mar, 2016

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रेप मामलों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि यदि लड़की शिक्षित और वयस्क है और शारीरिक संबंध बनाते समय ना नहीं कहती है तो वह रिश्तों में अलगाव होने के बाद रेप का आरोप नहीं लगा सकती। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी एक युवक की गिरफ्तारी से पूर्व जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

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जस्टिस मृदुला भाटकर की बेंच ने इस व्याख्या के साथ 25 साल के शख्स को रेप के मामले में अग्रिम जमानत दे दी। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहाः

“ऐसे मामलों में हमारा मानना है कि ये सब आम सहमति से होता है, इसलिए बेल मंजूर की जाती है। इसे रेप नहीं माना जा सकता। आप बालिग हैं, एजुकेटेड हैं और आप के पास ना कहने का ऑप्शन भी है, लेकिन आपने उस वक्त इन्कार नहीं किया। इसलिए इसे रजामंदी से बनाया गया रिलेशन ही समझा जाएगा।”

क्या है पूरा मामला?

यह मामला महाराष्ट्र के सोलापुर का है, जिसकी सुनवाई गुरुवार को हाई कोर्ट में हुई। जिस शख्स पर रेप का आरोप लगाया गया, उसने दावा किया कि वह 24 साल की एक महिला के साथ रिलेशनशिप में था। शख्स ने कोर्ट को बताया कि वह जिस महिला के साथ रिलेशनशिप में था, उसने पिछले साल उसके खिलाफ रेप की FIR दर्ज कराई थी।



FIR के मुताबिक, मार्च 2015 में उन दोनों की मुलाकात हुई थी। जिसके बाद उनका अफेयर शुरु हुआ। शख्स ने शादी का झांसा देकर महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए। पिछले ही साल महिला प्रेग्नेंट हुई। महिला ने जब प्रेगनेंसी के बारे में शख्स को बताया तो उसने गर्भपात कराने का दवाब डाला, जिसके बाद महिला से अपना रिश्ता तोड़ लिया। FIR में रेप, धमकी और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं।


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हालांकि, कोर्ट ने शख्स को महिला या उसके परिवार को धमकाने या फोन करने को लेकर चेताया है।


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