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फसल कटाई के दौरान मनाए जाने वाले भारतीय त्योहारों का है वैज्ञानिक महत्व

Published on 25 January, 2017 at 3:42 pm By

भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने वाले त्योहारों पर नजर डालें तो ऐसे ज्यादातर त्योहार फसल कटाई के बाद ही पड़ते हैं।

मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल और भोगाली बिहू, देश के विभिन्न राज्यों में इन त्योहारों को मनाने के पीछे का उद्देश्य सूर्य देवता का आभार प्रकट करना है, क्‍योंकि फसलों के पकने में सूर्य की भूमिका अहम होती है।

लोहड़ी पौष माह के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद माघ संक्रांति से पहली रात मनाया जाता है। यह प्राय: 12 या 13 जनवरी को पड़ता है। लोहड़ी के आस-पास ही 14 या 15 जनवरी को भारत के कई राज्यों में मकर संक्रांति या खिचड़ी और तमिलनाडु में पोंगल मनाया जाता है।


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इन त्योहारों का केवल कृषि और धार्मिक महत्व ही नहीं है, बल्कि इनका संबंध स्वास्थ्य से भी जुड़ा है। ये त्योहार हमारे शरीर में से अस्वस्थ पदार्थों को खत्म कर, एक नई स्फूर्ति प्रदान करने में सहायक होते हैं, जो शरीर, मन और आत्मा को ताजगी प्रदान करता है।

इन त्योहारों में कई विशेष व्यजन बनाए जाने का रिवाज है। मसलन, उत्तर भारत में गुड़, तिल और चिवड़ा से पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। इस दिन दही और खिचड़ी (नए चावल से तैयार) खाने की भी परंपरा है। जिन चावलों से खिचड़ी तैयार की जाती है वह विशेषकर लंबे होते हैं, क्योंकि ऐसे चावलों में पौष्टिक तत्व अधिक मात्रा में होते हैं।



हाल के अध्ययनों में पाया गया है कि सुक्ष्म सफेद चावल की तुलना में लंबे सफ़ेद चावल, पाचन की दृष्टि से अच्छे होते हैं।

देश के विभिन्न राज्यों में खिचड़ी बनाने के तरीके अलग-अलग हैं। इसमें कई तरह की दालों का इस्तेमाल किया जाता है। खिचड़ी पचने में आसान और प्रोटीन से भरपूर होती है।

वहीं, लोहड़ी की बात करें तो यह त्योहार मध्य जनवरी में पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि इस पर्व के दौरान सूर्यदेव मकर राशि से गुजरकर उत्तर की ओर रुख करते है। इस पर्व पर संचित सामग्री से चौराहे या मोहल्ले के किसी खुले स्थान पर आग जलाई जाती है और फिर अग्नि की परिक्रमा की जाती है। रेवड़ी, मक्की के भुने दाने, गुड़ और सूखे मेवे अग्नि को भेंट किए जाते हैं और ये ही चीजें प्रसाद के रूप में सभी उपस्थित लोगों को बांटी जाती हैं।

सर्दियों के मौसम में शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए प्रसाद में दी गई इन चीजों का विशेष महत्व है। सूखे मेवे, मक्की के भुने दाने शरीर में ऊर्जा का संचार करने में सहायक होते हैं। वहीं, गुड़ में लौह पदार्थ पाए जाते हैं, जो कड़कड़ाती ठंड से हमारे शरीर का बचाव करने में सक्षम है।


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ऐसे ही भारत में कई त्योहार हैं जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपने अस्तित्व के होने का प्रमाण देते हैं।

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