हरिवंशराय बच्चन की कविताएं आपको जीवन के सभी पहलुओं से रूबरू कराती हैं

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Updated on 10 Dec, 2018 at 1:03 pm

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कालजयी कृतियों के रचनाकार हरिवंशराय बच्चन की कविताएं उनके व्यक्तित्व और जीवन-दर्शन की झलक हैं। उनको निःसंदेह ‘हालावादी’ काव्यधारा के प्रतिनिधि के रूप में स्वीकार किया जाता है, क्योंकि इन्हीं के काव्य में इस धारा का सर्वाधिक निखरा, प्रखर और प्रभावी स्वरूप दिखाई देता है। ऐसा सिर्फ़ साहित्य में ही यह संभव है कि लोगों को जिस लड़खड़ाते कदमों के लिए कोसा जाता हो, उसमें भी एकता व धार्मिक सौहार्द्र की भावना खोज ली जाए। कलम का ऐसा जादू हरिवंशराय बच्चन के अलावा और कहां देखने को मिलता है।

 

harivansh rai bachchan poems

 


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बच्चनजी ने अपनी कविताओं में ‘हालावाद’ के द्वारा जीवन की सारी नीरसताओं  से मुंह मोड़ने के बजाय उसे  मधुरता और आस्था  के साथ सिर्फ़ स्वीकार ही नहीं किया, बल्कि उसका आनंदपूर्ण उपयोग करके साहित्य को ‘मधुशाला’ जैसी कालजयी महा-काव्य भेंट प्रदान किया, जो निःसंदेह हिन्दी साहित्य की आत्मा का अभिन्न अंग है। बच्चन जी ने मधुशाला को उस समय रचा था, जब उनकी आयु महज 27-28 वर्ष की थी। अतः स्वाभाविक है कि यह महा-काव्य यौवन रस के ज्वार से परिपूर्ण है।

 

Harivansh Rai Bachchan Poems

 

दीवानों का वेश बनाकर, उन्मुक्त मादकता, मस्ती का संदेश लिये फिरने वाले हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवंबर 1907 को इलाहाबाद के करीब प्रतापगढ़ जिले के पट्टी में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। बचपन में इन्हें बच्चन कहकर पुकारा जाता था, जिसका शाब्दिक अर्थ बच्चा या संतान होता है। अंग्रेजी साहित्य में एम.ए करने के पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय में वह अंग्रेजी के प्राध्यापक नियुक्त हुए तथा 1952 में उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पी.एच.डी की उपाधि प्राप्त की थी। वे कुछ समय तक इलाहाबाद के आकाशवाणी केन्द में भी रहे। 1955 में उनकी नियुक्ति भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में हिन्दी विशेषज्ञ के पद पर हुई। 1966 में वे राज्यसभा के सदस्य मनोनित हुए, जहां वे 6 वर्षों तक रहे। 1926 में 19 वर्ष की उम्र में ही उनका विवाह श्यामा बच्चन से हुआ था, जो इस समय 14 वर्ष की थीं। दुर्भाग्यवश 1936 में श्यामा की टीबी के कारण मृत्यु हो गई। श्यामा की मृत्यु ने उनके काव्य में घोर निराशा और वेदना भर दी थी। किंतु यह अंधकार शीघ्र ही छट गया और वे पुन: मधुरता, आस्था और विश्वास के गीत गाने लगे। 1941 में बच्चन ने तेजी सूरी से विवाह किया जो रंगमंच तथा गायन से जुड़ी हुई थीं।

बच्चन ने 1973 में अपना काव्य सृजन लगभग समेट लिया था। हिन्दी कविता और साहित्य के इस मूर्धन्य कवि का निधन 18 जनवरी 2003 को मुम्बई में हुआ।

 

Harivansh Rai Bachchan Poems - Madhushala

 

बच्चनजी ने प्रेम, सौंदर्य, दर्द, दुःख, मृत्यु और जीवन की सभी झांकियों को शब्दों में पिरोकर जिस खूबसूरती से अपनी कविताओं में पेश किया, उसका नमूना कहीं और नहीं मिलता। उन्होंने हमेशा आम आदमी के लिए सरल भाषा में लिखा।

 

Harivansh Rai Bachchan Poems

 



बच्चनजी की कविताओं की ख़ास बात यह है कि वे सहजता और संवेदनशील सरलता की पोशाक पहने हुए हैं। समाज की अभावग्रस्त व्यथा, परिवेश का चमकता हुआ खोखलापन, नियति और व्यवस्था के आगे व्यक्ति की असहायता और बेबसी बच्चन जी के लिए सहज, काव्य विषय थे। इसमें वास्तविकता का अस्वीकरण नहीं है, न उससे भागने की परिकल्पना है।

 

Harivansh Rai Bachchan Poems

 

बच्चनजी की कविताएं वास्तविकता के तप्त मरुस्थल को सींचकर हरी-भरी बना देने की सशक्त प्रेरणा है।

 

वे जीवन में फ़ारसी के प्रसिद्ध कवि ‘उमर ख्य्याम’ से प्रभावित थे। हिन्दी में पन्त उनको प्रिय रहे। किन्तु पन्त की निराशा उनको नहीं भाई। जीवन में उन्होंने बहुत उतार-चढ़ाव देखे। अभाव की दशा में पत्नी के असाध्य रोग की भयावहता ‘निशा निमंत्रण’ में झलकती है ।

 

Harivansh Rai Bachchan Poems

 

पहली पत्नी के मृत्यु नें उनके काव्य में कुछ समय के लिए ज़रूर घोर निराशा और वेदना भर दिया था, किंतु यह अंधकार शीघ्र ही छट गया और वे पुन: मधुरता, आस्था और विश्वास के गीत गाने लगे।

 

Harivansh Rai Bachchan Poems

बच्चनजी का जीवन दर्शन आशा से परिपूर्ण है। वे इस जीवन की हर बूंद का आनन्द उठाना चाहते थे। उनकी कविताओं में संवेदनाओं की सहज अनुभूति होती है।

 

Harivansh Rai Bachchan Poems - TopYaps

 

इसमें कोई संदेह नही है कि बच्चन जी का नाम सिर्फ़ हिन्दी साहित्य में ही नहीं, बल्कि भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में शोभित है उनकी लोकप्रियता मात्र पाठकों के स्वीकरण पर ही आधारित नहीं थी। जो कुछ मिला, वह उन्हें अत्यन्त रुचिकर जान पड़ा। उन्होंने अवसाद के छायावादी  युग में वेदनाग्रस्त मन को वाणी का वरदान दिया। उनकी हर कविता पढ़ कर ऐसा जान पड़ता है कि ‘अरे! ऐसा ही तो हमारे दिल में था!’ टॉपयॅप्स टीम आदरणीय हरिवंश राय ‘बच्चन’ जी  को  स्मरण करते हुए नमन करता है।


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