हनुमान जी ने भी लिखी थी रामायण, लेकिन वाल्मीकि की वजह से उन्होंने उसे समुद्र में बहा दिया था

Updated on 24 Oct, 2018 at 1:43 pm

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रामायण के रचनाकार महर्षि वाल्मीकि का जन्मदिवस हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। साल 2018 में वाल्मीकि जयंती 24 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। महर्षि वाल्मीकि की लिखी रामायण सबसे ज़्यादा मशहूर है, लेकिन क्या आप जानते हैं श्रीराम के परम भक्त हनुमान ने भी एक रामायण लिखी थी वो भी वाल्मीकि से पहले और उनसे भी सुंदर, तो आखिर कहां गई हनुमान की लिखी वो रामायण और क्यों कहीं इसका ज़िक्र नहीं मिलता?

हनुमान जी से बड़ा श्रीराम का और कोई भक्त नहीं हुआ ये बात तो सभी जानते हैं। लोगों के मन ये सवाल आता भी होगा कयों हनुमान जी ने खुद रामायण की रचना क्यों नहीं की, जबकि वो भगवान राम को सबसे करीब से जानते थे और महान ज्ञाता भी थे।

तो बता दें पवनपुत्र हनुमान ने रामायण लिखी थी जिसका नाम था हनुमद रामायण, लेकिन उसे खुद हनुमान जी समुद्र में बहा दिया।

 

 


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हनुमान जी ने वाल्मीकि से पहले ही रामायण की रचना कर ली थी। लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद श्रीराम जब अयोध्या चले गए तो हनुमान जी ने हिमालय पर जाकर पहाड़ पर रामयाण लिखी और लेखनी के लिए अपने नाखूनों का इस्तेमाल किया। उधर वाल्मिकी भी अपनी रामायण लिख रहे थे। वाल्मिकी महाकवि और राम के भक्त थे। रामयण पूरी करने के बाद वाल्मीकि ने सोचा इसे शिव को समर्पित किया जाए जिसके लिए वो कैलाश पर्वत पहुंचे। वहां उन्होंने देखा हनुमान जी ने भी रामायण लिखी है और वो उनकी रामायण से कहीं ज़्यादा बेहतर है।

 

 

वाल्मीकि ने हनुमान के महाकाव्य की तारीफ़ करते हुए कहा आपकी रचना के सामने तो मेरा लेखन कुछ भी नहीं है। ये सुनकर हनुमान जी ने सोचा वाल्मीकि श्रीराम के भक्त हैं और उनकी रचना में भी श्रीराम का गुणगान ही है, भले ही वो मेरी रचना जैसी सुंदर न हो, ऐसे में उन्होंने उनके काम को प्रसिद्धी दिलानी चाहिए। यही सोचकर हनुमान जी ने अपनी लिखी रामायण वाली चट्टान को समुद्र में बहा दिया।

ये देखकर वाल्मीकि हैरान रह गए। हनुमान जी का ये त्याग देखकर वाल्मीकि ने उन्हें प्रणाम करते हुए कहा आप धन्य है रामदूत हनुमान। कहते हैं कलयुग में वाल्मीकि ही तुलसीदास के रूप में जन्में थे और उन्होंने रामचरित मानस की रचना की।

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