शहीद हवलदार हंगपन को अशोक चक्र, कश्मीर में अकेले मार गिराए थे 4 आतंकी

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Updated on 26 Jan, 2017 at 9:11 pm

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शहीद हवलदार हंगपन दादा को गणतंत्र दिवस के अवसर पर मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में एक मुठभेड़ के दौरान चार आंतकवादियों को मार गिराया था। राजपथ पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने हंगपन की पत्नी चासेन लोवांग दादा को यह सम्मान दिया। अशोक चक्र शांति काल में दिया जाने वाला सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है। इसे परमवीर चक्र के बराबर माना जाता है।


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पिछले साल 27 मई को उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में कुछ आतंकवादी भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। 36 साल के हंगपन ने बहादुरी से उनका मुकाबला किया चार आतंकवादियों को मार गिराया। इस दौरान वह बुरी तरह जख्मी हो गए और वीरगति को प्राप्त हुए।

अरुणाचल प्रदेश के बोदुरिया गांव के रहने वाले हवलदार हंगपन अपनी टीम में ‘दादा’ के नाम से जाने जाते थे। वह पिछले साल हाई माउंटेन रेंज में तैनात थे। उन्होंने वर्ष 1997 में सेना ज्वाइन की थी। बाद में 35 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात किए गए।

हंगपन दादा के नाम पर शिलांग के असम रेजीमेंटल सेंटर (एआरसी) में प्लेटिनियम जुबली सेरेमनी के दौरान एक एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक का नाम रखा गया है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर उन पर एक डॉक्युमेन्ट्री भी रिलीज की गई है।

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